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वाइन (Wine)

वाइन मुख्यतः अंगूर के रस के किण्वन से बनाई जाती है। अन्य फलों के रस से बनाई गयी वाइन को सामान्यतया फ़्रूट वाइन, कन्ट्री वाइन या फल के नाम पर वाइन बोला जाता है जैसे एप्पल वाइन, प्लम वाइन इत्यादि। बियर की भाँति ही वाइन भी एक अनासवित मदिरा है, परन्तु कुछ प्रकार की वाइन में कुछ मात्रा में आसवित स्प्रिट ब्राण्डी मिलाई जाती है जिससे कि वाइन का किण्वन रुक जाता है और उसमें एल्कॉहल का प्रतिशत भी बढ़ जाता है। इस प्रकार की वाइन को दृढ़ीकृत वाइन या फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन कहते हैं। पोर्ट वाइन (पुर्तगाल) , शेरी (स्पेन), वरमूथ (Vermouth, इटली), मदीरॉ (Madeira, पुर्तगाल) और जिंजर वाइन (इंगलैंड) प्रमुख फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन हैं। ये स्वाद में मीठी होती हैं इसलिये इन्हें डेज़र्ट वाइन भी कहते हैं। सभी प्रकार की वाइन मुख्यतः खाने के साथ, उसके पहले या बाद में पी जाती हैं। इसके अलावा कुछ प्रकार की वाइन में कार्बन डाई ऑक्साइड की सार्थक मात्रा होती है इन्हें स्पार्कलिंग वाइन कहते हैं। इनमें कार्बन डाई ऑक्साइड बियर की भाँति किण्वन के फलस्वरूप प्राकृतिक रूप से भी हो सकती है और कृत्रिम रूप से भी डाली गयी हो सकती है। शैम्पेन (Champagne) एक प्रसिद्ध स्पार्कलिंग वाइन है जो कि फ्रांस के शैम्पेन इलाक़े में बनती है।

वाइन भी एक ऐतिहासिक मदिरा है। इस्राइल, ज्योर्जिया, इरान, चीन, यूनान और मिस्र देशों में 6000 वर्ष ईसा पूर्व भी इसके बनाये जाने के प्रमाण मिले हैं। पुराकाल से ही वाइन उत्सव, शुभ कार्य और सामूहिक भोज का अटूट अंग रहा है। प्राचीन काल के बहुत से धार्मिक संस्थान (मुख्यतः चर्च) भी वाइन पीने को बढ़ावा देते थे और उन्होंने बियर पीना निषिद्ध कर रखा था क्योंकि ये बर्बर लोगों का पेय माना जाता था जबकि वाइन सभ्य लोगों का। वैसे वाइन और बियर के प्रशंसकों के बीच यह घमासान अभी तक चला आ रहा है। फ्रांस आज एक प्रमुख वाइन उत्पादक देश है, इसके अलावा इटली, स्पेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी विश्व भर में अच्छी मात्रा में वाइन निर्यात करते हैं।

वाइन में एल्कोहल का प्रतिशत 9 से 30% तक हो सकता है, परन्तु साधारणतः सामान्य वाइन में 12-15% और फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन में 20-25% तक एल्कॉहल होता है। वाइन का नामांकन उसके बनने के स्थान या उसे बनाने में प्रयुक्त अंगूर की किस्म पर किया जाता है। यदि किसी वाइन में 75% से अधिक एक ही किस्म का अंगूर प्रयुक्त होता है तो उसे वेराइटल वाइन कहते हैं जैसे मर्लो (Merlot), कैबर्ने सोवेन्यों (Cabernet Sauvignon), शार्डने (Chardonnay), पिनॉ नोआर (Pinot noir) इत्यादि। इसके विपरीत मिश्रित या ब्लेंडेड वाइन में कई किस्म के अंगूर प्रयुक्त होते हैं और इन्हें मुख्यतः इनके बनने के स्थान के नाम से जाना जाता है जैसे बोर्डो (Bordeaux), शॉटो (Chateau) इत्यादि। विंटेज वाइन एक ही मौसम के अंगूर से बनाई जाती हैं और उन पर वह वर्ष अंकित होता है।

साधारण भाषा में वाइन के रंग के आधार पर इन्हें रेड वाइन रोज़ वाइन और व्हाइट वाइन में बाँटा जाता है। वाइन एक महँगी मदिरा है, भारतीय वाइन की एक बोतल (750 ml) 200 रूपये से 1,000 रुपये तक होती है जबकि आयातित वाइन 600 रुपये से लेकर 5,000 रुपये या उससे भी महँगी हो सकती है।

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