Tag Archives: शेरी

ब्रांडी (Brandy)

ब्रांडी को वाइन के आसवन से बनाया जाता है अर्थात ब्रांडी का मुख्य मूल स्रोत अंगूर का रस है। इसमें एल्कॉहल प्रतिशत 36-60% तक होता है और यह डीजेस्टीफ़[1] (digestif) के रूप में ली जाती है। सामान्यतः ब्रांडी का परिपक्वन नहीं किया जाता, यदि किया भी जाता है तो अपेक्षाकृत कम समय के लिये। ब्रांडी के प्रमुख उत्पादक देशों में पश्चिमी यूरोप के देश आते हैं जैसे फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, जर्मनी, इटली आदि। इसके अलावा अमेरिका (कैलिफ़ोर्निया), दक्षिण अफ्रीका, अर्मेनिया, बुल्गारिया, मैक्सिको और साइप्रस भी ब्रांडी का उत्पादन करते हैं। भारत में भी ब्रांडी के गिने चुने ब्राँड उपलब्ध हैं – हनी बी ब्रांडी, डॉक्टर्स ब्रांडी आदि। अंगूर के अलावा किसी अन्य फल के रस से बनी ब्रांडी को फ्रूट ब्रांडी या उस फल के नाम की ब्रांडी कहते हैं जैसे – कोकोनट ब्रांडी, एप्पल ब्रांडी आदि। इसके अलावा फलों के छिलकों और रस निकालने के बाद बचे गूदे जिसे पामेस (pomace) कहते हैं, से भी ब्रांडी बनाई जाती है।

अंगूर से निर्मित ब्रांडी के प्रकार: उत्पादन क्षेत्र के आधार पर यूरोप की तीन सर्वप्रसिद्ध ब्रांडी हैं –

कोनयाक (Cognac): फ्रांस के कोनयाक क्षेत्र में निर्मित ब्रांडी को कोनयाक कहते हैं। इसके प्रमुख ब्राँड्स हैं – हाइन (Hine), मारटेल (Martell), रेमी मार्टिन (Rémy Martin), हेनेसी (Hennessy), रेनॉ सबोरिन (Ragnaud-Sabourin), डेलामेन (Delamain) और करवाइज़र (Courvoisier)।

आर्मनयाक (Armagnac): दक्षिण पश्चिमी फ्रांस के आर्मनयाक इलाके के अंगूर से निर्मित ब्रांडी को आर्मनयाक कहते हैं। इसके प्रमुख ब्राँड्स हैं – डेरॉज़ (Darroze), बैरॉन डी सिगॉनयाक (Baron de Sigognac), लैरेसिंगल (Larressingle), डेलॉर्ड (Delord) और जानॉ (Janneau)।

ब्रांडी डि जारेज़ (Brandy de Jerez): दक्षिणी स्पेन के जारेज़ क्षेत्र में बनी ब्रांडी को ब्रांडी डि जारेज़ कहते हैं। इसे स्पेन की प्रसिद्ध फोर्टीफाइड वाइन, शेरी (Sherry) बनाने के लिये भी प्रयोग में लाया जाता है।

फ्रूट ब्रांडी के प्रकार:

ओ-डी-वी (Eau-de-vie): सामान्य फ्रेंच फ्रूट ब्रांडी
केल्वाडोस (Calvados): सेब से बनी एक फ्रेंच ब्रांडी
कोकोनट ब्रांडी: नारियल पानी या उसके पेड़ से निकाले रस से निर्मित ब्रांडी
जर्मन श्नाप्स (Schnaps): जर्मनी और ऑस्ट्रिया की फ्रूट ब्रांडी
कीर्शवासर (Kirschwasser): जर्मनी, स्विटज़रलैंड और फ्रांस में चेरी से बनी ब्रांडी
इसके अलावा लगभग सभी यूरोपीय देशों में फलों की ब्रांडी की एक विशिष्ट किस्म पायी जाती है।

पामेस (Pomace) ब्रांडी: इटली की ग्रापा (Grappa), फ्रांस की मार्क (Marc) और जॉर्जिया की चा-चा (Chacha) प्रसिद्ध पामेस ब्रांडी हैं।

इसके अलावा ब्रांडी के लेबल पर ए सी (A C), वी एस (V S), वी एस ओ पी (V S O P), एक्स ओ (X O) या विंटेज (Vintage) लिखा होता है जिनका मतलब है –
ए सी (A C): दो साल परिपक्वित
वी एस (V S): “वेरी स्पेशल” या थ्री स्टार, तीन साल परिपक्वित
वी एस ओ पी (V S O P): “वेरी स्पेशल ओल्ड पेल” या फाइव स्टार, पाँच साल परिपक्वित
एक्स ओ (X O): “एक्सट्रा ओल्ड”, सामान्यतः छः साल परिपक्वित
विंटेज (Vintage): अंकित विंटेज वर्ष के अंगूरों से निर्मित और बोतल बन्द होने तक परिपक्वित

ब्रांडी

ब्रांडी

__________

[1] डीजेस्टीफ़ (digestif) एक फ़्रेंच शब्द है जिसका मतलब है भोजन के पश्चात पिया जाने वाला एल्कॉहलिक पेय या पाचन बढ़ाने वाली मदिरा। इसके विपरीत भोजन से पूर्व लिये जाने वाले एल्कॉहलिक पेय को अपेरेटीफ़ (aperitif), या भूख बढ़ाने वाली मदिरा कहते हैं।

Advertisements

2 टिप्पणियाँ

Filed under मदिराओं के प्रकार

वाइन (Wine)

वाइन मुख्यतः अंगूर के रस के किण्वन से बनाई जाती है। अन्य फलों के रस से बनाई गयी वाइन को सामान्यतया फ़्रूट वाइन, कन्ट्री वाइन या फल के नाम पर वाइन बोला जाता है जैसे एप्पल वाइन, प्लम वाइन इत्यादि। बियर की भाँति ही वाइन भी एक अनासवित मदिरा है, परन्तु कुछ प्रकार की वाइन में कुछ मात्रा में आसवित स्प्रिट ब्राण्डी मिलाई जाती है जिससे कि वाइन का किण्वन रुक जाता है और उसमें एल्कॉहल का प्रतिशत भी बढ़ जाता है। इस प्रकार की वाइन को दृढ़ीकृत वाइन या फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन कहते हैं। पोर्ट वाइन (पुर्तगाल) , शेरी (स्पेन), वरमूथ (Vermouth, इटली), मदीरॉ (Madeira, पुर्तगाल) और जिंजर वाइन (इंगलैंड) प्रमुख फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन हैं। ये स्वाद में मीठी होती हैं इसलिये इन्हें डेज़र्ट वाइन भी कहते हैं। सभी प्रकार की वाइन मुख्यतः खाने के साथ, उसके पहले या बाद में पी जाती हैं। इसके अलावा कुछ प्रकार की वाइन में कार्बन डाई ऑक्साइड की सार्थक मात्रा होती है इन्हें स्पार्कलिंग वाइन कहते हैं। इनमें कार्बन डाई ऑक्साइड बियर की भाँति किण्वन के फलस्वरूप प्राकृतिक रूप से भी हो सकती है और कृत्रिम रूप से भी डाली गयी हो सकती है। शैम्पेन (Champagne) एक प्रसिद्ध स्पार्कलिंग वाइन है जो कि फ्रांस के शैम्पेन इलाक़े में बनती है।

वाइन भी एक ऐतिहासिक मदिरा है। इस्राइल, ज्योर्जिया, इरान, चीन, यूनान और मिस्र देशों में 6000 वर्ष ईसा पूर्व भी इसके बनाये जाने के प्रमाण मिले हैं। पुराकाल से ही वाइन उत्सव, शुभ कार्य और सामूहिक भोज का अटूट अंग रहा है। प्राचीन काल के बहुत से धार्मिक संस्थान (मुख्यतः चर्च) भी वाइन पीने को बढ़ावा देते थे और उन्होंने बियर पीना निषिद्ध कर रखा था क्योंकि ये बर्बर लोगों का पेय माना जाता था जबकि वाइन सभ्य लोगों का। वैसे वाइन और बियर के प्रशंसकों के बीच यह घमासान अभी तक चला आ रहा है। फ्रांस आज एक प्रमुख वाइन उत्पादक देश है, इसके अलावा इटली, स्पेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी विश्व भर में अच्छी मात्रा में वाइन निर्यात करते हैं।

वाइन में एल्कोहल का प्रतिशत 9 से 30% तक हो सकता है, परन्तु साधारणतः सामान्य वाइन में 12-15% और फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन में 20-25% तक एल्कॉहल होता है। वाइन का नामांकन उसके बनने के स्थान या उसे बनाने में प्रयुक्त अंगूर की किस्म पर किया जाता है। यदि किसी वाइन में 75% से अधिक एक ही किस्म का अंगूर प्रयुक्त होता है तो उसे वेराइटल वाइन कहते हैं जैसे मर्लो (Merlot), कैबर्ने सोवेन्यों (Cabernet Sauvignon), शार्डने (Chardonnay), पिनॉ नोआर (Pinot noir) इत्यादि। इसके विपरीत मिश्रित या ब्लेंडेड वाइन में कई किस्म के अंगूर प्रयुक्त होते हैं और इन्हें मुख्यतः इनके बनने के स्थान के नाम से जाना जाता है जैसे बोर्डो (Bordeaux), शॉटो (Chateau) इत्यादि। विंटेज वाइन एक ही मौसम के अंगूर से बनाई जाती हैं और उन पर वह वर्ष अंकित होता है।

साधारण भाषा में वाइन के रंग के आधार पर इन्हें रेड वाइन रोज़ वाइन और व्हाइट वाइन में बाँटा जाता है। वाइन एक महँगी मदिरा है, भारतीय वाइन की एक बोतल (750 ml) 200 रूपये से 1,000 रुपये तक होती है जबकि आयातित वाइन 600 रुपये से लेकर 5,000 रुपये या उससे भी महँगी हो सकती है।

10 टिप्पणियाँ

Filed under मदिराओं के प्रकार