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मदिरा की उचित मात्रा

एक बार में परोसी जाने वाली मदिरा की मात्रा कई बातों पर निर्भर करती है जैसे मदिरा का प्रकार, प्रयोजन, भौगोलिक वातावरण, सरकारी विनियम और स्वास्थ्य। साधारण तौर पर एक बार में दी जाने वाली मदिरा, जिसे एक यूनिट या एक सर्विंग कहते हैं, में 25 मिली लीटर से अधिक शुद्ध एल्कॉहल नहीं होना चाहिये। इस हिसाब से एक यूनिट में लगभग 500 मिली लीटर बियर (5% ABV1), 200 मिली लीटर वाइन (12.5% ABV) और 60 मिली लीटर आसवित मदिरा जैसे व्हिस्की, वोडका, ब्रांडी आदि (43% ABV) आती है। अमेरिका में एक यूनिट मदिरा में 0.6 आउन्स (17.75 मिली लीटर) एल्कॉहल होना चाहिये जबकि इंगलैंड में यह सीमा 10 मिली लीटर है। भारत में एक यूनिट, जिसे पेग (peg) भी कहा जाता है, में 20 मिली लीटर एल्कॉहल होता है अर्थात 350 मिली लीटर बीयर (8% ABV), 160 मिली लीटर वाइन और 45 मिली लीटर आसवित मदिरा। सामान्यतः शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति दिन में 1 से 2 यूनिट मदिरा बिना किसी खास दुष्प्रभाव के पी सकता है।

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1ABV == Alcohol by Volume, एल्कॉहल का आयतन प्रतिशत

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स्वादयुक्त मदिरा (Flavored liquor)

स्वाद और सुगन्धयुक्त मदिरा या फ़्लेवर्ड लिकर (Flavored liquor) पिछले पोस्ट में बताये गये लिकूर से भिन्न होते हैं क्योंकि इनमें चीनी नहीं या फिर काफी कम मात्रा में होती है। ये सामान्यतया रंगहीन लिकर अर्थात वोडका और लाइट रम में कुछ स्वाद और सुगन्धित फलों, मसालों, जड़ी बूटियों का सार (essence) मिला कर बनाये जाते हैं। इनमें एल्कॉहल प्रायः मूल मदिरा से 2-5% तक कम होता है।

स्वादयुक्त मदिरा के कुछ मुख्य प्रकार निम्न हैं –

एब्सिन्थ (Absinthe): ये वॉर्मवुड (wormwood) या आर्टेमीसिया एब्सिन्थियम (Artemisia absinthium), सौंफ और कुछ अन्य जड़ी बूटियों से बनाया जाता है। इसका रंग हल्का हरा होता है।

अक्वावीट (Akvavit): ये मुख्यतः स्कैन्डिनीवियन देशों में आलू या अनाज की स्प्रिट और केरावे (caraway) के बीजों से बनायी जाने वाली मदिरा है।

ऐरेक (Arak): ये पूर्वी भूमध्यसागरीय देशों (सीरिया, लेबनान, इस्रायल, जार्डन आदि) में पी जाने वाली सौंफ के स्वाद की रंगहीन मदिरा है। यूनान में बनी ऊज़ो (Ouzo) भी इसी प्रकार की मदिरा है।

जिन (Gin): ये जूनिपर बेरी (juniper berry) के स्वाद की रंगहीन मदिरा है।

राकी (Raki): ये तुर्की की सौंफ़ के स्वाद की ब्रांडी है।

जीपोरो (Tsipouro): ये यूनान (Greece) की सौंफ के स्वाद वाली पामेस ब्रांडी (अंगूर का रस निकालने के बाद बचे अवशेष से बनी ब्रांडी) है। जीकोडिया (Tsikoudia) भी एक इससे मिलती जुलती मदिरा है।

फ़्लेवर्ड वोडका (Flavored vodka): वोडका अनेकों प्रकार के विभिन्न स्वादों में मिलता है। जिनमें से प्रमुख हैं नींबू, सन्तरा, सेब, रसभरी (Raspberry), वनीला और आड़ू। इसके अतिरिक्त ये मौसमी और अन्य खट्टे फल (Citrus fruits), स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, मुनक्का, किशमिश, कॉफ़ी, चॉकलेट, अनार, आलूबुखारा, नारियल, पोदीना, आम, गुलाब, केला इत्यादि के स्वाद में भी वोडका उपलब्ध है।

फ़्लेवर्ड रम (Flavored rum): वोडका की ही भाँति लाइट रम भी अनेकों स्वादों में मिलती है जिनमें नींबू, सन्तरा, नारियल, अनन्नास, वनीला और आम प्रमुख हैं। इसके अलावा बहुत सी लाइट और डार्क रम मसालों के स्वाद में भी मिलती है।

फ़्लेवर्ड टेक़ीला (Flavored tequila): टेक़ीला नींबू, सन्तरा, आम, नारियल, अनार कॉफ़ी और हरी मिर्च के स्वाद में मिलता है।

बिटर्स (Bitters): ये जड़ी बूटियों और खट्टे फलों का एल्कॉहल और/या ग्लिसरीन में मिला पेय है। इनका प्रयोग बहुत से कॉकटेल बनाने और भोजन के बाद पीने के अलावा अनेकों दवाओं में भी होता है।

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कॉकटेल (Cocktail)

मिश्रित एल्कॉहलिक पेय को कॉकटेल कहते हैं। इसमें एक या अधिक एल्कॉहलिक पेय (मदिरा) के साथ फलों का रस, सोडा, चीनी, बिटर्स[1] और मसाले मिले होते हैं। कॉकटेल सामान्यतया अधिक स्वादिष्ट और मीठे पेय होते हैं जो अक्सर पार्टी और उत्सवों में पिये जाते हैं। इन्हें बनाने में अपेक्षाकृत सस्ती मदिराओं का प्रयोग होता है और इनसे पर्याप्त मात्रा में जलीय और पोषक तत्व मिले होने के कारण इनके पीने से डीहाइड्रेशन और हैंगओवर की सम्भावना अपेक्षाकृत कम होती है।

कॉकटेल बनाते समय आप अपने स्वादानुसार प्रयोग करके अनेकों नये पेय बना सकते हैं। परन्तु इस प्रक्रिया में गलतीयों से बचने के लिये सबसे अच्छा तरीका है कि पहले आप प्रचलित कॉकटेल के बारे में जानिये और उससे मिलता जुलता आपको अच्छा लगने वाला मिश्रण तैयार कीजिये।

प्रस्तुत है सबसे अधिक प्रचलित और अपेक्षाकृत आसानी से बनाये जा सकने वाले 5 कॉकटेल।

मार्टीनी

मार्टीनी

1. मार्टीनी (Martini)

सामग्री: जिन[2] (Gin), ड्राई वरमूथ[3] (Dry Vermouth), जैतून (Olive)/नींबू का छिलका

गिलास: मार्टीनी ग्लास

1.5 आउन्स[4] (45 मिली) जिन और 0.75 आउन्स (22 मिली) ड्राई वरमूथ को अच्छी तरह से मिलाकर मार्टीनी ग्लास में जैतून या नींबू के छिलके के साथ परोसें। जिन के स्थान पर इसमें वोडका भी मिला सकते हैं, उस स्थिति में इसे वोडका मार्टीनी कहते हैं।

मोहीटो

मोहीटो

2. मोहीटो (Mojito)

सामग्री: लाइट रम, लाइम जूस, चीनी, क्लब सोडा, पोदीना पत्ती

गिलास: हाईबॉल ग्लास

सबसे पहले पोदीना पत्ती, दो चम्मच चीनी और थोड़ा सोडा वाटर मिलाकर चीनी को घुलने दें। अब उसमें बर्फ के टुकड़े, दो या तीन आउन्स लाइट रम और एक आउन्स लाइम जूस मिलाकर अच्छी तरह से हिलायें। अब पिसी हुई बर्फ से भरे हाईबाल ग्लास में इस मिश्रण को सोडे के साथ डालकर उसके ऊपर 2-3 पोदीना पत्ती के साथ परोसें।

पीना कोलाडा

पीना कोलाडा

3. पिना कोलाडा (Pina Colada)

सामग्री: लाइट रम, नारियल दूध (Coconut milk) या मालिबू रम, अनन्नास (Pineapple)

गिलास: हाईबॉल या कॉलिंस ग्लास

नारियल दूध ताजे नारियल के गूदे को बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसने के बाद छानकर बनाया जाता है। यह नारियल पानी से अलग है। तो मोहीटो बनाने के लिये 3 आउन्स लाइट रम में 3 बड़े चम्मच नारियल दूध और 3 बड़े चम्मच अनन्नास के टुकड़े मिलाकर उसे मिक्सी में बर्फ के साथ बहुत कम समय के लिये पीसें और फिर गिलास में कुछ अनन्नास के टुकड़ों के साथ परोसें। नारियल दूध के स्थान पर मालिबू रम का भी प्रयोग किया जा सकता है। यह एक नारियल के स्वाद की लाइट रम है। इससे पिना कोलाडा बनाने के लिये दो भाग मालिबू रम में दो भाग अनन्नास का रस और एक भाग दूध या मलाई मिलाकर उसे बर्फ के साथ पीसते हैं।

मार्गरीटा ग्लास

मार्गरीटा ग्लास

4. मार्गरीटा (Margarita)

सामग्री: टेक़ीला[5], ट्रिपल सेक[6], लाइम जूस और नमक

गिलास: मार्गरीटा ग्लास

मार्गरीटा ग्लास के किनारे (rim) पर लाइम जूस लगा कर उसे नमक में डुबाइये जिससे नमक उसके किनारों पर चिपक जायेगा। अब 1.5 आउन्स टेक़ीला, 0.5 आउन्स ट्रिपल सेक और 1 आउन्स लाइम जूस मिलाकर अच्छी तरह से हिलाइये। अब इसे नमक लगे मार्गरीटा ग्लास में डालकर परोसें।

ब्लडी मेरी

ब्लडी मेरी

5. ब्लडी मेरी (Bloody Mary)

सामग्री: वोडका, टमाटर का रस, वॉस्टरशियर सॉस[7], टबास्को सॉस[8], नींबू, नमक, पिसी काली मिर्च

गिलास: ओल्ड फ़ैशन्ड ग्लास या हाईबॉल ग्लास

1.5 आउन्स वोडका, 3 आउन्स टमाटर का रस, आधे नींबू का रस, आधा चम्मच वॉस्टरशियर सॉस और 2-3 बूँद टबास्को सॉस मिलाकर अच्छी तरह से मिलायें। अब लोबॉल ग्लास के किनारों पर नींबू का रस लगाकर उस पर नमक चिपकायें और मिश्रण को गिलास में डालकर उसमें स्वादानुसार नमक और पिसी हुयी काली मिर्च के साथ परोसें।

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। वर्ष 2009 आपके जीवन में सुख, समृद्धि और अपार खुशियाँ ले कर आये।

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[1] बिटर जड़ी-बूटियों और फलों के रस के मिश्रण से बने एल्कॉहलिक पेय को कहते हैं। इसका स्वाद कड़वा या कड़वा मीठा होता है। इसका प्रयोग कॉकटेल में एक अलग प्रकार का स्वाद लाने में होता है।
[2] जिन (Gin) जूनिपर बेरी और अनाजों से बनाई जाने वाली रंगहीन स्प्रिट है।
[3] वरमूथ (Vermouth) इटली की प्रसिद्ध फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन है जिसमें सुगन्धित जड़ी बूटियाँ और मसाले मिले होते हैं। बिना मीठी वरमूथ को ड्राई वरमूथ कहते हैं।
[4] एक आउन्स में लगभग 30 मिली लीटर होते हैं (1 US fluid ounce = 29.5735296 ml)
[5] टेक़ीला या टक़ीला (Tequila) मैक्सिको में अगेव नामक पौधे से बनाई जाने वाली मदिरा है।
[6] ट्रिपल सेक (Triple sec) एक सन्तरे के स्वाद की मीठी मदिरा अर्थात लिकूर (liqueur) है। जो सूखे सन्तरे के छिलकों को ब्रांडी या लाइट रम में डालकर बनाया जाता है।
[7] वॉस्टरशियर सॉस (Worcestershire sauce) लहसुन, इमली, सोय सॉस, प्याज, सिरका, शीरा और नींबू आदि से मिलकर बना होता है। इसे सर्वप्रथम अंग्रेजों ने भारत में बनाया था और इसका नाम एक ब्रिटिश काउन्टी के नाम पर है जहाँ यह सबसे पहले बोतल बंद हुआ।
[8] टबास्को सॉस (Tabasco sauce) अमेरिका में पायी जाने वाली एक प्रकार की विशेष लाल मिर्च (टबास्को) और सिरके से बनाया जाता है।

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वोडका (Vodka)

परम्परागत तरीके से वोडका आलू से निकाली गयी स्टार्च के किण्वन और आसवन से बनता है, पर इसके अलावा इसे अनाज या शीरे से बनाया जाता है। यह एक पारदर्शी और लगभग स्वादहीन मदिरा है जिस कारण इसका प्रयोग बहुत से कॉकटेल बनाने में किया जाता है। इसमें 35-60% तक एल्कॉहल होता है। वोडका प्रमुखतः पूर्वी यूरोप (रूस, उक्रेन, पोलैण्ड आदि) और नॉर्डिक देशों (नॉर्वे, फिनलैण्ड, स्वीडन, आइसलैण्ड और ग्रीनलैण्ड) में पिया जाता है। इसके प्रमुख उत्पादक देश रूस, रोमानिया, पोलैंड और अन्य पूर्वी यूरोपीय देश हैं।

किण्वन के पश्चात मातृद्रव का कई बार आसवन किया जाता है जिससे कि एल्कॉहल प्रतिशत 95-96% तक पहुँच जाता है। तत्पश्चात इसे पारदर्शी और स्वाद रहित बनाने के लिये चारकोल और अन्य निस्पादकों से भली भाँति छाना जाता है। उसके बाद इसे उचित एल्कॉहल प्रतिशत तक लाने के लिये इसमें आसवित जल मिलाकर बोतलबंद कर देते हैं। यूरोप में अक्सर वोडका को बिना कुछ मिलाये पिया जाता है। कई बार वोडका में कुछ फलों (सेब, सन्तरा, नींबू आदि) के कृत्रिम स्वादवर्धक तत्व भी मिलाये जाते हैं।

स्मिर्नऑफ़ (Smirnoff, रूस) और एब्सॉल्यूट (Absolut, स्वीडन) विश्व के सबसे अधिक प्रचलित वोडका ब्राँड हैं। भारत में स्मिर्नऑफ़ के अलावा मैजिक मूमेंट्स (Magic Moments), रोमानोव (Romanov), व्हाइट मिस्चीफ़ (White Mischief), शार्क टूथ (Shark Tooth) और फ़्यूल (Fuel) वोडका उपलब्ध हैं।

वोडका

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मदिरा – 101

अंग्रेजी में विभिन्न प्रकार की मदिराओं के अलग अलग नाम हैं जबकि हिन्दी में सामान्यतः सभी प्रकार की मदिराओं को मदिरा, शराब, सुरा, सोमरस, मद्य, दारू या चालू भाषा में ठर्रा और न जाने क्या क्या कहा जाता है। इन सभी का शाब्दिक अर्थ है एल्कोहल युक्त मादक पेय या अंग्रेजी में कहें तो एल्कोहलिक बेवेरेज (alcoholic beverages)। सभी प्रकार की मदिराओं को दो अवयवों में विभाजित कर सकते हैं एक एल्कोहल जिससे नशा होता है और दूसरा उसके अन्य तत्व जोकि उसकी स्वाद, सुगन्ध, रंग और पौष्टिकता के लिये जिम्मेदार होते हैं। सरलता के लिये हिन्दी में भी हम सभी प्रकार की मदिराओं के लिये प्रयुक्त अंग्रेजी शब्दों का ही प्रयोग करेंगे। इससे पहले कि हम आगे बढ़ें कुछ तकनीकी शब्दों को जान लें। सभी प्रकार की मदिरायें किण्वन या फ़र्मन्टेशन नाम की जैविक क्रिया से बनायी जाती हैं यही क्रिया सिरका और खमीर बनाने के लिये भी उत्तरदायी है। इस क्रिया से प्रयुक्त मूल पदार्थ में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट, स्टार्च इत्यादि के क्षरण से एल्कोहल बनता है और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलती है। अधिकतर मदिराओं के उत्पादन में जो दूसरी जैव-रासायनिक क्रिया प्रयुक्त होती है उसे कहते हैं परिपक्वन या एजिंग। इस क्रिया में किण्वन के बाद प्राप्त मदिरा को किसी विशेष प्रकार के पात्र में एक नियत ताप पर कुछ समय (कभी कभी कई वर्षो तक) के लिये रखकर उसके स्वाद, सुगन्ध व पौष्टिकता में वृद्धि की जाती है। इसके अलावा किण्वन के पश्चात प्राप्त; मातृ-द्रव के शोधन के लिये आसवन या डिस्टिलेशन का प्रयोग करते हैं। तो आइये जानते हैं कि विश्व में कौन कौन सी प्रसिद्ध मदिरायें पायी जाती हैं उनका स्रोत और कुछ अन्य अनूठी बातें। सभी प्रकार की मदिराओं को मुख्यतः तीन भागों में बाँट सकते हैं बियर, वाइन और स्प्रिट। बियर और वाइन में अपेक्षाकृत कम एल्कोहल होता है, इनका आसवन नहीं किया जाता और ये बिना कुछ मिलाये पी जाती है जबकि स्प्रिट में अधिक एल्कोहल होने के कारण इसमें पानी, सोडा, फलों का रस या कोल्ड ड्रिंक मिला कर पीते हैं।

बियर (Beer): बियर मुख्यतः जौ, गेहूँ, मक्का इत्यादि अनाजों के अधूरे किण्वन और बहुत कम समय (1-2 सप्ताह) के परिपक्वन से बनायी जाती है। किण्वन और परिपक्वन के समय निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से बियर एक प्राकृतिक रूप से कार्बोनेटेड पेय है। इसमें एल्कोहल प्रतिशत 3 से 30% तक हो सकता है। परन्तु सामान्यतया लाइट बियर में 4% और स्ट्रॉंग बियर में 8% एल्कोहल होता है। जर्मन बियर सबसे प्रसिद्ध हैं। भारत में किंगफ़िशर, हेवर्ड 5000, फ़ोस्टर, गोल्डन ईगल इत्यादि ब्रान्ड्स बाज़ार में उपलब्ध हैं। विभिन्न प्रदेशों मे कर भिन्नता के कारण 650 ml की बोतल का दाम 40 से 90 रुपये तक होता है। बियर के बारे और जानकारी एक अलग पोस्ट में।

वाइन (Wine): वाइन मुख्यतः फलों के रस (अधिकतर अंगूर) के पूरे किण्वन और परिपक्वन से बनाई जाती है। इसमें एल्कोहल का प्रतिशत 9 से 18% तक हो सकता है। फ्रांस एक प्रमुख वाइन उत्पादक देश है, इसके अलावा इटली, स्पेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी विश्व भर में अच्छी मात्रा में वाइन निर्यात करते हैं। वाइन का नामांकन उसे बनाने में प्रयुक्त अंगूर के प्रकार पर किया जाता है, जैसे मर्लो (Merlot), कैबर्ने सोवेनॉन (Cabernet Sauvignon), शार्डना (Chardonnay), पिनॉ नोआर (Pinot noir) इत्यादि। साधारण भाषा में वाइन के रंग के आधार पर इन्हें रेड वाइन और व्हाइट वाइन में बाँटा जाता है। बियर की ही भाँति वाइन का भी आसवन नहीं किया जाता है। वाइन एक महँगी मदिरा है, भारतीय वाइन की एक बोतल (750 ml) 300 रूपये से 1,000 रुपये तक होती है जबकि आयातित वाइन 600 रुपये से लेकर 5,000 रुपये या उससे भी महँगी हो सकती है। वाइन के बारे में और अधिक जानकारी आगे आने वाली पोस्ट में।

व्हिस्की (Whisky): व्हिस्की मुख्यतः जौ, गेहूँ, मक्का इत्यादि अनाजों के पूरे किण्वन, आसवन और परिपक्वन द्वारा बनाई जाती है। इसमें एल्कॉहल प्रतिशत 30 से 65% तक हो सकता है, परन्तु सामान्यतया यह 43% होता है। स्कॉटलैंड एक प्रमुख व्हिस्की उत्पादक देश है और वहाँ पर बनाई गयी व्हिस्की को स्कॉच (Scotch) कहते हैं, इसके अलावा आयरलैंड और अमेरिका भी व्हिस्की के प्रमुख उत्पादक हैं। जो व्हिस्की अंकुरित अनाज से बनाई जाती है उसे माल्ट व्हिस्की कहते हैं और यह अपेक्षाकृत अच्छी और महँगी होती है। बिना अंकुरण के अनाज से बनाई जाने वाली व्हिस्की को ग्रेन व्हिस्की कहते हैं। सामान्यतः कई व्हिस्की को मिलाकर मिश्रित या ब्लेंडेड व्हिस्की के रूप में बेचा जाता है। व्हिस्की की गुणवत्ता और दाम उसके परिपक्वन के समय और एकल या मिश्रित प्रकार पर निर्भर करते हैं। भारत में निर्मित ग्रेन व्हिस्की की एक बोतल (750 ml) का दाम 200 रुपये से 1000 रुपये तक होता है जबकि एक आयातित 21 वर्ष पुरानी स्कॉच का दाम 4,000 रुपये 10,000 रुपये या और अधिक हो सकता है। व्हिस्की के बारे में और अधिक जानकारी अगले पोस्ट में।

ब्रान्डी (Brandy): ब्रान्डी को वाइन के आसवन से बनाया जाता है। इसमें 36-60% तक एल्कॉहल होता है। इसका उत्पादन भी मुख्यतः यूरोपीय देशों मे ही होता है।

रम (Rum): रम गन्ने के रस या शीरे (molasses) के किण्वन और आसवन से बनायी जाती है। इसमें भी 40 से 70% तक एल्कॉहल होता है। प्रमुख उत्पादकों मे कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी देश आते हैं।

वोडका (Vodka): वोडका को आलू से निकाली गयी स्टार्च के किण्वन और आसवन से बनाते हैं। इसमें 40-60% तक एल्कॉहल होता है। इसके प्रमुख उत्पादक देश रूस, रोमानिया, पोलैंड और अन्य पूर्वी यूरोपीय देश हैं।

इसके अतिरिक्त जिन (Gin), ताड़ी (Toddy) जोकि नारियल और ताड़ के पेड़ से निकाली जाती है, फ़ेनी (Fenny) जोकि मुख्यतः गोवा में काजू से बनाई जाती है, टक़ीला (Tequila) जोकि मैक्सिको में अगेव नामक पौधे से बनाई जाती है, साके (Sake) जोकि जापान में चावल से बनाई जाती है इत्यादि अन्य प्रमुख मदिरायें है जो कि विश्व के विभिन्न भागों में प्रचलित हैं।

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