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स्वादयुक्त मदिरा (Flavored liquor)

स्वाद और सुगन्धयुक्त मदिरा या फ़्लेवर्ड लिकर (Flavored liquor) पिछले पोस्ट में बताये गये लिकूर से भिन्न होते हैं क्योंकि इनमें चीनी नहीं या फिर काफी कम मात्रा में होती है। ये सामान्यतया रंगहीन लिकर अर्थात वोडका और लाइट रम में कुछ स्वाद और सुगन्धित फलों, मसालों, जड़ी बूटियों का सार (essence) मिला कर बनाये जाते हैं। इनमें एल्कॉहल प्रायः मूल मदिरा से 2-5% तक कम होता है।

स्वादयुक्त मदिरा के कुछ मुख्य प्रकार निम्न हैं –

एब्सिन्थ (Absinthe): ये वॉर्मवुड (wormwood) या आर्टेमीसिया एब्सिन्थियम (Artemisia absinthium), सौंफ और कुछ अन्य जड़ी बूटियों से बनाया जाता है। इसका रंग हल्का हरा होता है।

अक्वावीट (Akvavit): ये मुख्यतः स्कैन्डिनीवियन देशों में आलू या अनाज की स्प्रिट और केरावे (caraway) के बीजों से बनायी जाने वाली मदिरा है।

ऐरेक (Arak): ये पूर्वी भूमध्यसागरीय देशों (सीरिया, लेबनान, इस्रायल, जार्डन आदि) में पी जाने वाली सौंफ के स्वाद की रंगहीन मदिरा है। यूनान में बनी ऊज़ो (Ouzo) भी इसी प्रकार की मदिरा है।

जिन (Gin): ये जूनिपर बेरी (juniper berry) के स्वाद की रंगहीन मदिरा है।

राकी (Raki): ये तुर्की की सौंफ़ के स्वाद की ब्रांडी है।

जीपोरो (Tsipouro): ये यूनान (Greece) की सौंफ के स्वाद वाली पामेस ब्रांडी (अंगूर का रस निकालने के बाद बचे अवशेष से बनी ब्रांडी) है। जीकोडिया (Tsikoudia) भी एक इससे मिलती जुलती मदिरा है।

फ़्लेवर्ड वोडका (Flavored vodka): वोडका अनेकों प्रकार के विभिन्न स्वादों में मिलता है। जिनमें से प्रमुख हैं नींबू, सन्तरा, सेब, रसभरी (Raspberry), वनीला और आड़ू। इसके अतिरिक्त ये मौसमी और अन्य खट्टे फल (Citrus fruits), स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, मुनक्का, किशमिश, कॉफ़ी, चॉकलेट, अनार, आलूबुखारा, नारियल, पोदीना, आम, गुलाब, केला इत्यादि के स्वाद में भी वोडका उपलब्ध है।

फ़्लेवर्ड रम (Flavored rum): वोडका की ही भाँति लाइट रम भी अनेकों स्वादों में मिलती है जिनमें नींबू, सन्तरा, नारियल, अनन्नास, वनीला और आम प्रमुख हैं। इसके अलावा बहुत सी लाइट और डार्क रम मसालों के स्वाद में भी मिलती है।

फ़्लेवर्ड टेक़ीला (Flavored tequila): टेक़ीला नींबू, सन्तरा, आम, नारियल, अनार कॉफ़ी और हरी मिर्च के स्वाद में मिलता है।

बिटर्स (Bitters): ये जड़ी बूटियों और खट्टे फलों का एल्कॉहल और/या ग्लिसरीन में मिला पेय है। इनका प्रयोग बहुत से कॉकटेल बनाने और भोजन के बाद पीने के अलावा अनेकों दवाओं में भी होता है।

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रम (Rum)

रम गन्ने के रस या शीरे[1] (molasses) के किण्वन और आसवन से बनायी जाती है। इसमें भी 40 से 70% तक एल्कॉहल होता है। प्रमुख उत्पादकों मे कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी देश (कोलम्बिया, गुयाना, वेनेजुएला, ब्राज़ील) आते हैं। रम के प्रचार और प्रसार में 15वीं सदी खोजी नाविकों (कोलम्बस, वास्कोडिगामा आदि), समुद्री डाकुओं (Pirates) और रॉयल नेवी (Royal Navy) का अहम योगदान रहा है। रम एक सस्ती मदिरा है अतः तीसरी दुनिया के देशों में अधिक प्रचलित है।

रंग, स्वाद और उत्पादन क्षेत्र के आधार पर रम कई प्रकार की होती हैं:

लाइट रम (Light Rum): इसे व्हाइट या सिल्वर रम भी कहते हैं। नाम के अनुसार यह पारदर्शी या बहुत हल्के रंग तथा हल्के मीठे स्वाद की होती है। प्रमुखतः इसे कॉकटेल बनाने में प्रयोग किया जाता है। इनका परिपक्वन सामान्यतः नहीं किया जाता, और यदि किया भी जाता है तो किसी भी प्रकार के रंग को हटाने के लिये इसे चारकोल से छाना जाता है। प्वेर्टो रीको (Puerto Rico) की बकार्डी सिल्वर (Bacardi Silver) और ब्राज़ील की कशाका (Cachaça) इस श्रेणी की प्रमुख रम हैं।

गोल्ड रम (Gold Rum): यह सुनहरे या अम्बर रंग की होती है इसलिये इसे अम्बर रम भी कहते है। इनमे रंग ओक के पीपों में किये गये परिपक्वन के कारण आता है। प्रमुख ब्राँड्स हैं – बकार्डी गोल्ड, बारबनकोर्ट 3 स्टार (Barbancourt 3-Star), माउंट गे एक्लिप्स (Mount Gay Eclipse)।

डार्क रम (Dark Rum): इसे ब्लैक रम भी कहते हैं। इन्हें अपेक्षाकृत अधिक समय (7 से 8 वर्ष) के लिये परिपक्वित किया जाता है। इनका प्रयोग बहुत से व्यंजन बनाने में भी किया जाता है। जमैका, बारबेडॉस, बरमूडा, त्रिनिदाद, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड आदि इसके पमुख उत्पादक देश हैं। प्रमुख ब्राँड्स हैं – बकार्डी 8 इयर, कैप्टन मोर्गन ब्लैक लेबल (Captain Morgan Black Lable), मायर्स डार्क (Myers’s Dark), गॉसलिंग्स ब्लैक सील (Gosling’s Black Seal), माउंट गे एक्सट्रा ओल्ड (Mount Gay Extra Old), बारबनकोर्ट 5 स्टार (Barbancourt 5-Star)। भारत में निर्मित ओल्ड मोंक (Old Monk), मैक डॉवेल नं 1 रम और कॉन्टेसा XXX रम इसी श्रेणी की रम हैं।

स्पाइस्ड रम (Spiced Rum): इनमें स्वाद वृद्धि के लिये कुछ मसाले या केरामेल मिलाया जाता है। मुख्य ब्राँड – कैप्टन मोर्गन ओरिजिनल स्पाइस्ड (Captain Morgan Original Spiced),

फ्लेवर्ड रम (Flavored Rum): इनमें कई फलों जैसे सन्तरा, नींबू, आम, नारियल आदि का कृत्रिम स्वाद मिला होता है। प्रमुख ब्राँड हैं – बकार्डी लिमॉन (Bacardi Limon) और कैप्टन मोर्गन पैरट बे (Captain Morgan Parrot Bay)।

प्रीमियम रम (Premium Rum): यह रम अधिक समय तक परिपक्वित की जाती है तथा इनका स्वाद, सुगंध और चरित्र बाकी रमों की अपेक्षा कहीं अधिक होता हैं। इन्हें स्कॉच और कोनयाक से प्रतिस्पर्धा हेतु बनाया जाता है और प्रायः बिना कुछ मिलाये ही पिया जाता है।

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[1] शीरा (molasses) चीनी मिल से निकलने वाला गहरे भूरे रंग का एक सह उत्पाद है। क्रिस्टल न बन सकने वाली शर्करा के अतिरिक्त इसमें सार्थक मात्रा में ग्लूकोज़, फ़्रक्टोज़, विटामिन और खनिज (कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन) तत्व होते हैं।

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मदिरा – 101

अंग्रेजी में विभिन्न प्रकार की मदिराओं के अलग अलग नाम हैं जबकि हिन्दी में सामान्यतः सभी प्रकार की मदिराओं को मदिरा, शराब, सुरा, सोमरस, मद्य, दारू या चालू भाषा में ठर्रा और न जाने क्या क्या कहा जाता है। इन सभी का शाब्दिक अर्थ है एल्कोहल युक्त मादक पेय या अंग्रेजी में कहें तो एल्कोहलिक बेवेरेज (alcoholic beverages)। सभी प्रकार की मदिराओं को दो अवयवों में विभाजित कर सकते हैं एक एल्कोहल जिससे नशा होता है और दूसरा उसके अन्य तत्व जोकि उसकी स्वाद, सुगन्ध, रंग और पौष्टिकता के लिये जिम्मेदार होते हैं। सरलता के लिये हिन्दी में भी हम सभी प्रकार की मदिराओं के लिये प्रयुक्त अंग्रेजी शब्दों का ही प्रयोग करेंगे। इससे पहले कि हम आगे बढ़ें कुछ तकनीकी शब्दों को जान लें। सभी प्रकार की मदिरायें किण्वन या फ़र्मन्टेशन नाम की जैविक क्रिया से बनायी जाती हैं यही क्रिया सिरका और खमीर बनाने के लिये भी उत्तरदायी है। इस क्रिया से प्रयुक्त मूल पदार्थ में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट, स्टार्च इत्यादि के क्षरण से एल्कोहल बनता है और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलती है। अधिकतर मदिराओं के उत्पादन में जो दूसरी जैव-रासायनिक क्रिया प्रयुक्त होती है उसे कहते हैं परिपक्वन या एजिंग। इस क्रिया में किण्वन के बाद प्राप्त मदिरा को किसी विशेष प्रकार के पात्र में एक नियत ताप पर कुछ समय (कभी कभी कई वर्षो तक) के लिये रखकर उसके स्वाद, सुगन्ध व पौष्टिकता में वृद्धि की जाती है। इसके अलावा किण्वन के पश्चात प्राप्त; मातृ-द्रव के शोधन के लिये आसवन या डिस्टिलेशन का प्रयोग करते हैं। तो आइये जानते हैं कि विश्व में कौन कौन सी प्रसिद्ध मदिरायें पायी जाती हैं उनका स्रोत और कुछ अन्य अनूठी बातें। सभी प्रकार की मदिराओं को मुख्यतः तीन भागों में बाँट सकते हैं बियर, वाइन और स्प्रिट। बियर और वाइन में अपेक्षाकृत कम एल्कोहल होता है, इनका आसवन नहीं किया जाता और ये बिना कुछ मिलाये पी जाती है जबकि स्प्रिट में अधिक एल्कोहल होने के कारण इसमें पानी, सोडा, फलों का रस या कोल्ड ड्रिंक मिला कर पीते हैं।

बियर (Beer): बियर मुख्यतः जौ, गेहूँ, मक्का इत्यादि अनाजों के अधूरे किण्वन और बहुत कम समय (1-2 सप्ताह) के परिपक्वन से बनायी जाती है। किण्वन और परिपक्वन के समय निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से बियर एक प्राकृतिक रूप से कार्बोनेटेड पेय है। इसमें एल्कोहल प्रतिशत 3 से 30% तक हो सकता है। परन्तु सामान्यतया लाइट बियर में 4% और स्ट्रॉंग बियर में 8% एल्कोहल होता है। जर्मन बियर सबसे प्रसिद्ध हैं। भारत में किंगफ़िशर, हेवर्ड 5000, फ़ोस्टर, गोल्डन ईगल इत्यादि ब्रान्ड्स बाज़ार में उपलब्ध हैं। विभिन्न प्रदेशों मे कर भिन्नता के कारण 650 ml की बोतल का दाम 40 से 90 रुपये तक होता है। बियर के बारे और जानकारी एक अलग पोस्ट में।

वाइन (Wine): वाइन मुख्यतः फलों के रस (अधिकतर अंगूर) के पूरे किण्वन और परिपक्वन से बनाई जाती है। इसमें एल्कोहल का प्रतिशत 9 से 18% तक हो सकता है। फ्रांस एक प्रमुख वाइन उत्पादक देश है, इसके अलावा इटली, स्पेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी विश्व भर में अच्छी मात्रा में वाइन निर्यात करते हैं। वाइन का नामांकन उसे बनाने में प्रयुक्त अंगूर के प्रकार पर किया जाता है, जैसे मर्लो (Merlot), कैबर्ने सोवेनॉन (Cabernet Sauvignon), शार्डना (Chardonnay), पिनॉ नोआर (Pinot noir) इत्यादि। साधारण भाषा में वाइन के रंग के आधार पर इन्हें रेड वाइन और व्हाइट वाइन में बाँटा जाता है। बियर की ही भाँति वाइन का भी आसवन नहीं किया जाता है। वाइन एक महँगी मदिरा है, भारतीय वाइन की एक बोतल (750 ml) 300 रूपये से 1,000 रुपये तक होती है जबकि आयातित वाइन 600 रुपये से लेकर 5,000 रुपये या उससे भी महँगी हो सकती है। वाइन के बारे में और अधिक जानकारी आगे आने वाली पोस्ट में।

व्हिस्की (Whisky): व्हिस्की मुख्यतः जौ, गेहूँ, मक्का इत्यादि अनाजों के पूरे किण्वन, आसवन और परिपक्वन द्वारा बनाई जाती है। इसमें एल्कॉहल प्रतिशत 30 से 65% तक हो सकता है, परन्तु सामान्यतया यह 43% होता है। स्कॉटलैंड एक प्रमुख व्हिस्की उत्पादक देश है और वहाँ पर बनाई गयी व्हिस्की को स्कॉच (Scotch) कहते हैं, इसके अलावा आयरलैंड और अमेरिका भी व्हिस्की के प्रमुख उत्पादक हैं। जो व्हिस्की अंकुरित अनाज से बनाई जाती है उसे माल्ट व्हिस्की कहते हैं और यह अपेक्षाकृत अच्छी और महँगी होती है। बिना अंकुरण के अनाज से बनाई जाने वाली व्हिस्की को ग्रेन व्हिस्की कहते हैं। सामान्यतः कई व्हिस्की को मिलाकर मिश्रित या ब्लेंडेड व्हिस्की के रूप में बेचा जाता है। व्हिस्की की गुणवत्ता और दाम उसके परिपक्वन के समय और एकल या मिश्रित प्रकार पर निर्भर करते हैं। भारत में निर्मित ग्रेन व्हिस्की की एक बोतल (750 ml) का दाम 200 रुपये से 1000 रुपये तक होता है जबकि एक आयातित 21 वर्ष पुरानी स्कॉच का दाम 4,000 रुपये 10,000 रुपये या और अधिक हो सकता है। व्हिस्की के बारे में और अधिक जानकारी अगले पोस्ट में।

ब्रान्डी (Brandy): ब्रान्डी को वाइन के आसवन से बनाया जाता है। इसमें 36-60% तक एल्कॉहल होता है। इसका उत्पादन भी मुख्यतः यूरोपीय देशों मे ही होता है।

रम (Rum): रम गन्ने के रस या शीरे (molasses) के किण्वन और आसवन से बनायी जाती है। इसमें भी 40 से 70% तक एल्कॉहल होता है। प्रमुख उत्पादकों मे कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी देश आते हैं।

वोडका (Vodka): वोडका को आलू से निकाली गयी स्टार्च के किण्वन और आसवन से बनाते हैं। इसमें 40-60% तक एल्कॉहल होता है। इसके प्रमुख उत्पादक देश रूस, रोमानिया, पोलैंड और अन्य पूर्वी यूरोपीय देश हैं।

इसके अतिरिक्त जिन (Gin), ताड़ी (Toddy) जोकि नारियल और ताड़ के पेड़ से निकाली जाती है, फ़ेनी (Fenny) जोकि मुख्यतः गोवा में काजू से बनाई जाती है, टक़ीला (Tequila) जोकि मैक्सिको में अगेव नामक पौधे से बनाई जाती है, साके (Sake) जोकि जापान में चावल से बनाई जाती है इत्यादि अन्य प्रमुख मदिरायें है जो कि विश्व के विभिन्न भागों में प्रचलित हैं।

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