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देशी शराब (Country Liquor)

देशी शराब अर्थात जो शराब बड़े बड़े कारखानों और मद्यनिष्कर्षशालाओं के बजाय गाँवों में छोटे स्तर पर और उपलब्ध सीमित संसाधनों से बनाई जाती है। जहाँ एक ओर ये हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर है वहीं दूसरी ओर सस्ती मदिरा के रूप में बहुत सी सामाजिक बुराइयों की जड़ है। यहाँ पर यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि सामान्यतया देशी शराब के ठेकों पर मिलने वाली शराब औद्योगिक स्पिरिट से बनाई जाती है और ये इस पोस्ट में बताई जाने वाली देशी शराब से भिन्न है। औद्योगिक स्पिरिट बड़े स्तर पर चीनी मिलों से जुड़ी मद्यनिष्कर्षशालाओं में शीरे से बनाया जाता है। पीये जा सकने वाले एल्कॉहल (potable alcohol) पर लगने वाले भारी करों से बचने के लिये इसमें 5% मिथाइल एल्कॉहल मिला दिया जाता है। देशी शराब के ठेकों पर इसका आसवन करके इसमें से मिथाइल एल्कॉहल अलग किया जाता है और कुछ पूरक तत्व मिलाकर इससे देशी शराब बनाई जाती है। यदि इसमें 0.3% से अधिक मिथाइल एल्कॉहल बचा रह जाता है तो शराब जहरीली होती है और इसे पीना प्राणघातक हो सकता है। इस पोस्ट में हम अनाजों, फलों और अन्य कृषि उपजों से बनाई जाने वाली मदिराओं के बारे में जानेंगे।

ताड़ी (Toddy or Arrack): ताड़ और नारियल के पेड़ से निकाले गये दूध से बनी मदिरा को ताड़ी कहते हैं। ताजी ताड़ी में एल्कॉहल नहीं होता और यह सुबह सुबह एक ऊर्जा दायक पेय के रूप में पी जाती है। 6-8 घंटों में इसमें किण्वन के फल स्वरूप एल्कॉहल बनने लगता है। इसका रंग सफेद और स्वाद कुछ कुछ मट्ठे जैसा होता है। इस प्रकार प्राप्त ताड़ी (Toddy) एक प्रकार की वाइन ही होती है जिसमें सामान्यतया 15% से कम एल्कॉहल ही होता है। इससे अधिक एल्कॉहल के लिये सागौन की लकड़ी के पीपों में इसका आसवन करके सुनहरे अम्बर के रंग की आसवित मदिरा (Arrack) भी बनाई जाती है जिसमें 30 से 50% तक एल्कॉहल होता है। भारत के अलावा ये श्रीलंका, इन्डोनेशिया और फिलीपीन्स में बनाई और पी जाती है। ताड़ी के कुछ प्रकार ब्रांडी की भाँति बनाये और बोतल बंद किये जाते हैं ये परिष्कृत और महँगे होते हैं।

फेनी (Fenny): ये काजू के फल के रस या नारियल से बनायी जाने वाली मदिरा है। गोवा की काजू फेनी प्रसिद्ध है। काजू के फल के रस का किण्वन और प्रथम आसवन के बाद प्राप्त मदिरा ताड़ी (Arrack) जैसी ही होती है। तृतीय आसवन के बाद प्राप्त मदिरा को फेनी कहते हैं। इसकी महक काफी तीव्र होती है।

महुआ (Mahuwa): महुआ या मधुका लोंगफोलिआ (Madhuca longifolia) पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और मध्य प्रदेश में पाया जाने वाला एक जंगली पेड़ है। महुआ के फूल का प्रयोग मदिरा बनाने में किया जाता है। यह आदिवासीय क्षेत्रों में प्रचलित है और उनकी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। उत्सवों और प्रायोजनों में इसका सामूहिक पान किया जाता है।

हडिया (Hadia): ये बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में चावल से बनाई जाने वाली एक प्रकार की बियर। झारखण्ड के आदिवासीय क्षेत्रों में ये काफी प्रचलित है और आजकल उनकी आजीविका के एक प्रमुख स्रोत के रूप में सामने आया है।

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