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बेल्जियन बियर

वैसे तो यूरोप के कई देशों की गिनती बियर प्रधान देशों में की जाती है परन्तु बेल्जियम की बात ही कुछ और है। इसी वजह से बेल्जियम को बियर का स्वर्ग (Beer Paradise) कहा जाता है। पिछले माह मुझे बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स की यात्रा का अवसर प्राप्त हुआ। यह पोस्ट मुख्यतः मेरे वहाँ जाने से पूर्व किये गये अनुसंधान और वहाँ जाकर किये गये अनुभव पर आधारित है। बेल्जियम पश्चिमी यूरोप में, फ्रांस के उत्तर, जर्मनी के पश्चिम और नीदरलैंड्स के दक्षिण में स्थित एक छोटा देश है। बियर के अतिरिक्त बेल्जियम की चॉकलेट भी विश्व प्रसिद्ध हैं, फिलहाल इस पोस्ट में केवल बियर की ही चर्चा करेंगे।

बेल्जियम में बड़ी बियर उत्पादक कम्पनियों के साथ साथ बहुत सी छोटी और स्वतंत्र कम्पनियाँ भी हैं। यहाँ करीब 125 माइक्रो-ब्र्यूवेरी हैं जो 800 से अधिक प्रकार की बियर बनाती हैं। यहाँ पर किसी बार के मीनू में यदि 400 से अधिक बियर मिल जायें तो इसमें कोई चौंकने वाली बात नहीं है। ड़ेलिरियम केफ़े में तो 2000 से अधिक ब्रांड्स की बियर मिलती हैं। बेल्जियन बियर में एल्कॉहल प्रतिशत भी अन्य बियर की तुलना में अधिक होता है। 8-9% प्रतिशत की बियर मिलना काफी साधारण बात है जबकि कुछ बियर में एल्कॉहल 11 या 12 % भी हो सकता है। बेल्जियन बियर के बारे दूसरी असामान्य बात यह है कि बहुत सी बियर पास्चुराइस्ड और पूरी तरह से छनित नहीं होती जिससे बोतल में भी उनका थोड़ा बहुत किण्वन जारी रहता है और बोतल के तल में अवसाद (sediment) पाया जाता है।

बेल्जियन बियर को मुख्यतः निम्न वर्गों में बाँट सकते हैं:

लैम्बिक (Lambic): इसे बेल्जियम की सबसे विशिष्ट बियर कहा जा सकता है। ये बेल्जियम की सेने घाटी (Senne valley), जिसमें ब्रसेल्स भी स्थित है, के वातावरण में मौजूद जंगली यीस्ट के किण्वन से बनाई जाती है तथा इसमें प्रयुक्त हॉप्स भी बासी होते हैं। सामान्यतः 3 से 5 वर्ष तक इसे लकड़ी के पीपों में परिपक्वित किया जाता है। इनका स्वाद इतना अम्लीय और खट्टा होता है कि पहली बार बहुत से लोग अचम्भित हो जाते हैं। अक्सर इन्हें कई फलों जैसे चेरी, स्ट्रॉबेरी आदि के साथ भिगो कर उन फलों के स्वाद पर आधारित किया जाता है। 1860 में लुई पास्चर द्वारा यीस्ट के विभिन्न प्रकारों के विकास से पहले सभी बियर इसी विधि से बनाई जाती थीं। लैम्बिक बियर अधिकांशतः शुद्ध रूप में नहीं पी जाती है और यदि पी भी जाती है तो 1 या 2 वर्ष तक परिपक्वन वाली। मुख्यतः दो या अधिक वर्षों की लैम्बिक बियर को मिलाकर या फलों के साथ मिलाकर इन्हें पिया जाता है। अलग अलग वर्षों की पुरानी मिश्रित लैम्बिक बियर को गॉज़ (Geuze) कहते हैं। इसमें नई लैम्बिक (कम वर्षों के लिये परिपक्वित) बियर में मिठास और फलों का स्वाद देती है जबकि पुरानी लैम्बिक बियर में खटास और अनूठा स्वाद लेकर आती है। गॉज़ सबसे अधिक बिकने वाली लैम्बिक बियर है। इसे बियर की दुनिया की शैम्पेन भी कहते हैं। मोर्ट सुबाइट (Mort Subite), कैन्टिलॉन (Cantillon) और टिमरमन्स (Timmermans) कुछ प्रमुख गॉज़ ब्रांड्स हैं। इसके अलावा फ़ैरो (Faro), क्रिक (Kriek) और फ़्रैम्बोज़ेन (Frambozen) अन्य लैम्बिक बियर हैं जो इसमें क्रमशः चीनी, चेरी और रेस्पबेरी मिला कर बनाई जाती हैं।

ट्रैपिस्ट और ऐबी बियर (Trappist and Abbey Beers): ट्रैपिस्ट बियर बेल्जियम की दूसरी सबसे प्रमुख बियर है। ट्रैपिस्ट एक रोमन कैथलिक धार्मिक नियमावली है जो कि संत बेनेडिक्ट को मानते हैं। ट्रैपिस्ट बियर, ट्रैपिस्ट महन्तों (Trappist monks) द्वारा अथवा उनके नियंत्रण वाली ब्र्यूवरी में बनाई गयी बियर को कहते हैं। इसके बारे में यह कहा जाता है कि “Probably the only good thing to come out of religion” 🙂 । दुनिया भर में केवल 7 ट्रैपिस्ट मठ (monasteries) बियर का उत्पादन करते हैं जिनमें से 6 बेल्जियम में और 1 नीदरलैंड्स में है। अकेल (Achel), चिमे (Chimay), ऑर्वेल (Orval), रॉकफोर्ट (Rochefort), वेस्टमाल (Westmalle) और वेस्टव्लेटेरेन (Westvleteren) बेल्जियम की तथा ला ट्रैप (La Trappe) नीदरलैंड्स की ट्रैपिस्ट बियर है। इसके अलावा बहुत सी व्यवसायिक कम्पनियाँ भी किसी मठ (Abbey) से वास्तविक या काल्पनिक सम्बन्ध होने के आधार पर बियर बनाती हैं जो ट्रैपिस्ट बियर से मिलती जुलती होती हैं इन्हें ऐबी (Abbey) बियर कहते हैं। लफ़े (Leffe) और ग्रिमबर्गन (Grimbergen) अच्छी ऐबी बियर हैं।

ट्रैपिस्ट और ऐबी बियर में डबल (double), ट्रिपल (triple) और क्वाड्रपल (quadruple) मुख्यतः बियर में एल्कॉहल की मात्रा के प्रतीक होते हैं। डबल में जहाँ 6-8% एल्कॉहल होता है वहीं ट्रिपल में 7-11% और क्वाड्रपल में 10-12% एल्कॉहल होता है। दूसरी ओर ब्लांड (blond) या ब्रून (bruin) बियर के रंग को प्रदर्शित करते हैं।

ब्राउन एल / रेड (Brown Ale / Red): ये उत्तरी पूर्वी बेल्जियम की प्रमुख बियर है और इसकी स्वाद में लैम्बिक से कई समानतायें हैं। लैम्बिक की भाँति इसके भी कुछ प्रकार फलों के साथ मिलाकर बनाये जाते हैं। चार्ल्स क्विंट (Charles Quint/Keizer Karel) एक काफ़ी प्रचलित ब्राउन एल है।

गोल्डन एल / ब्लांड (Golden Ale / blond): इनका रंग हल्का लगभग किसी भी सामान्य लागर बियर जैसा होता है परन्तु एल्कॉहल 7-9% तक होता है। डुवेल (Duvel) इस वर्ग की एक प्रमुख बियर है।

उपर्युक्त बियर के अलावा कुछ प्रमुख बेल्जियन लागर बियर हैं स्टेला आर्टोइस (Stella Artois), ज़ूपिलर (Jupiler), मास पिल्स (Maes Pils) और हॉगार्डेन (Hoegaarden), जो कि सस्ती और बड़े पैमाने पर बनाई जाने वाली बियर हैं, फलस्वरूप इनकी उपलब्धता बेल्जियम के बाहर भी काफ़ी अधिक है। यद्यपि इनके स्वाद और सुगन्ध में विविधता और विशिष्टता की कमी है।

बेल्जियन बियर

बेल्जियन बियर के बारे में और अधिक जानकारी निम्न पतों पर उपलब्ध है:

बियर प्लानेट: इस दुकान पर 800 से अधिक प्रकार की बेल्जियन बियर मिलती हैं।

The Belgian Beer Odyssey: यहाँ पर आप बेल्जियन बियर की समीक्षा पढ़ सकते हैं। अब तक 100 बियर प्रस्तुत की जा चुकी हैं।

Belgian Beers: एक और बेल्जियन बियर समीक्षा वेबसाइट।

A Beginner’s Guide to Belgian Beer: बेल्जियन बियर के बारे में संक्षिप्त प्रारम्भिक जानकारी (इस पोस्ट के कुछ तथ्य यहाँ से उद्धृत हैं)

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कुछ प्रसिद्घ एल

एल ऊपरी किण्वन करने वाले यीस्ट (top fermenting yeast) से बनाई जाती है तथा इसका किण्वन सामान्य से अधिक ताप (15-23 oC) किया जाता है। अधिक ताप पर एल बियर यीस्ट प्रचुर मात्रा में ईस्टर (esters) बनाता है जिसकी वजह से बियर में सेब, नाशपाती, अनन्नास, केला, सूखी घास, बेर और आलूबुखारे इत्यादि से मिलती जुलती सुगन्ध और स्वाद आते हैं। इस पोस्ट में कुछ प्रचलित एल बियर के बारे में जानते हैं।

पेल एल (Pale Ale): यह हल्के रंग के अनाज से बनाई गयी एल है जिसका रंग 8 से 14 oSRM के बीच होता है। यद्यपि आजकल मिलने वाली कई बियर इससे हल्के रंग की होती है, परन्तु इसका नामकरण समकालीन ब्रिटिश पोर्टर और अन्य गहरे रंग की बियर की तुलना में किया गया था। इंगलैण्ड की बिटर (Bitter), स्कॉटलैंड की हैवी (Heavy) और इंडिया पेल एल (India Pale Ale/IPA), अमेरिका की अमेरिकन पेल एल (American Pale Ale) और जर्मनी की आल्ट्बीयर (Altbier या Alt) कुछ प्रमुख पेल एल हैं।

इनमें से इंडिया पेल एल (India Pale Ale/IPA) 17 वीं सदी में भारत में तैनात ब्रिटिश सैनिकों के लिये बनायी गयी बियर थी जिसमें साधारण से अधिक मात्रा में हॉप्स का प्रयोग किया जाता था ताकि लम्बी समुद्री यात्रा के बाद भी बियर खराब न हो। उस समय यह बियर केवल भारत को निर्यात के लिये ही बनाई जाती थी। परन्तु धीरे धीरे ब्रिटिश सैनिकों को इस बियर का स्वाद अच्छा लगने लगा और वापस लौटकर भी उन्होंने इसकी मांग की और आज भी यह बियर इंडिया पेल एल (India Pale Ale) या आई पी ए (IPA) के नाम से मिलती है। ये बियर सामान्य से अधिक कड़वी होती है और इसका IBU 40 से अधिक होता है।

पोर्टर (Porter): यह गहरे रंग के अनाज से बनी एल बियर है जिसका नाम 18वीं सदी में लंदन के स्ट्रीट और रिवर पोर्टर (सामान वाहक) के नाम पर पड़ा। अधिक एल्कॉहल वाली पोर्टर को स्ट्राँग पोर्टर, डबल पोर्टर या स्टाउट पोर्टर कहा जाता था जो कि आगे चलकर सिर्फ़ स्टाउट (Stout) कहा जाने लगा। आयरलैंड की गिनेस (Guinness) एक एक्सट्रा स्टाउट बियर है। इसका रंग 17 से 40 oSRM के बीच और IBU 18 से 50 तक होता है। इन बियर में अधिक मात्रा में माल्ट के प्रयोग से ये सामान्य से भारी होती हैं (विशिष्ट घनत्व 1.066 – 1.095)।

बार्ली वाइन (Barley wine): इनमें एल्कॉहल प्रतिशत 9 -12 तक (वाइन के बराबर) होता है अतः इसे बार्ली वाइन बोला जाता है परन्तु फलों के बजाय अनाज (जौ) से बनाई जाने के कारण यह एक बियर ही है। इसका रंग 12 से 24 oSRM के बीच और IBU 50 से 100 तक होता है। ये बियर 1.090 – 1.120 विशिष्ट घनत्व तक के मातृद्रव से बनायी जाती हैं जो कि सामान्य से काफी अधिक है।

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बियर के प्रकार

बियर के प्रकार या सही मायने में इसे शैली कहें तो मुख्यतः दो भागों में बाँट सकते हैं। एल (Ale) और लागर (Lager)। जैसा कि मैनें बियर पर अपनी पहली पोस्ट में भी लिखा था कि एल ऊपरी किण्वन करने वाले यीस्ट (top fermenting yeast) से बनाई जाती है जबकि लागर नीचले किण्वन करने वाले यीस्ट (Bottom fermenting yeast) से बनाई जाती है। बड़ी मात्रा में औद्योगिक स्तर पर बनाई जा सकने के कारण लागर बीयर सस्ती और अधिक प्रचलित होती है। इसके विपरीत एल बियर साधारणतः छोटे स्तर पर बनाई जाती है और अपेक्षाकृत महंगी होती है। यह वर्गीकरण तो हुआ बियर बनाने वाले यीस्ट के आधार पर। इन दोनों ही प्रकार की बियर में बनाने की विधि, रंग, स्वाद, अवयव, इतिहास और मूल स्थान के कारण और कई विविधतायें पायी जाती हैं। इस पोस्ट में हम बियर की इन्ही विविधताओं के बारे में जानते हैं।

कुछ प्रमुख एल हैं – ब्राउन एल (Brown Ale), पेल एल (Pale Ale), पोर्टर (Porter), स्टाउट (Stout), बार्ली वाइन (Barley Wine), बेल्जियन ट्रिपल (Belgian Trippel), बेल्जियन डबल (Belgian Dubbel) और व्हीट बियर (Wheat beer)।

प्रमुख लागर हैं – अमेरिकन स्टाइल लागर (American-style lager), बॉक (Bock), डंकल (Dunkel), हेलेस (Helles), ऑक्टोबरफ़ेस्टबीयर (Oktoberfestbier), पिल्ज़नर (Pilsner), श्वार्ज़बीयर (Schwarzbier) और वियना लागर (Vienna lager)।

इसके अलावा बेल्जियन लैम्बिक (Belgian Lambic), स्टीम बियर (Steam Beer), फ्रूट और वेजिटेबल बियर, हर्ब्स और स्पाइस्ड बियर इत्यादि कुछ अन्य प्रकार की बियर हैं।

इसके अलावा बियर शब्दावली में दो और नाम प्रसिद्ध हैं ड्रैफ़्ट बियर (Draught Beer) और क्राफ़्ट बियर (Craft Beer)। ड्रैफ़्ट बियर बड़े बंद बर्तन, जिसे केग (Keg) कहते हैं, में लगे नल (tap) से निकाल कर पी जाती है। अत: सामान्यतः बार या पार्टी में देखी जाती है। छोटी ब्र्यूवरी में सीमित मात्रा में बनी बियर को क्राफ़्ट बियर कहते हैं।

आने वाली पोस्टों में इस पोस्ट में बताई गयी कुछ बियर के बारे में और जानकारी लेंगे।

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बियर (Beer)

बियर सम्भवतः विश्व की सबसे पुरानी मदिरा है जो मुख्यतः जौ, गेहूँ, मक्का इत्यादि अनाजों से बनायी जाती है। इतिहास में मेसोपोटामिया और प्राचीन मिस्र की सभ्यताओं में इसके प्रमाण हैं। पानी और चाय के बाद यह विश्व का तीसरा सबसे अधिक पिया जाने वाला पेय है। बियर अन्य मदिराओं की अपेक्षा काफ़ी कम समय में तैयार हो जाती है और अपेक्षाकृत सस्ती होती है। इसे अनाजों के आंशिक किण्वन और उसके बाद एक से दो सप्ताह के परिपक्वन से बनाया जाता है। मूलतः कोई भी आंशिक किण्वन से बनने वाली मदिरा जिसका आसवन न किया गया हो बियर कहलाती है।

सबसे पहले स्टार्च स्रोत (मुख्यतः यव्यित जौ) को गर्म पानी के साथ मिलाकर पीसते हैं एक से दो घंटों में स्टार्च शर्करा में परिवर्तित हो जाता है। उसके बाद मिश्रण को छानकर उसे करीब एक और घंटे के लिये उबाला जाता है जिससे कि उसमें उपस्थित एन्जाइम नष्ट हो जायें। इस मिश्रण को वोर्ट (wort) कहते हैं। अब वोर्ट में कुछ स्वाद वर्धक सामग्री जैसे हॉप (Hop) आदि मिलाकर उसे ठंडा करते हैं। इसके बाद उसमें खमीर या यीस्ट मिलाकर उसे एक से दो सप्ताह के लिये किण्वन हेतु रख देते हैं। इसके फलस्वरूप वोर्ट एक साफ द्रव में परिवर्तित हो जाता है जिसे बियर कहते हैं। किण्वन और परिपक्वन के समय निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से बियर एक प्राकृतिक रूप से कार्बोनेटेड पेय है।

बियर के प्रकार: बियर मुख्यतः दो प्रकार की होती है एल (Ale) और लागर (Lager)। एल ऊपरी किण्वन करने वाले यीस्ट से बनाई जाती है जबकि लागर नीचले किण्वन करने वाले यीस्ट से बनाई जाती है। लागर बियर अपेक्षाकृत कम तापमान पर बनायी जाती है और यह अधिक प्रचलित है। बियर का रंग उसे बनाने में प्रयुक्त अनाज के रंग पर निर्भर करता है और हल्का पीले अम्बर रंग से गहरे काले रंग तक हो सकता है। गहरे रंग की बियर जिसे स्टाउट (stout) बियर भी कहते हैं भुनी हुयी जौ से बनाई जाती है।

बियर में एल्कोहल प्रतिशत 3 से 30% तक हो सकता है। परन्तु सामान्यतया लाइट बियर में 4% और स्ट्रॉंग बियर में 8% एल्कोहल होता है। जर्मन बियर सबसे प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा बेल्जियम, आयरलैंड और अमेरिका बियर के मुख्य उत्पादक और उपभोक्ता हैं। विश्व के प्रमुख बियर ब्रांड्स में से कुछ है – बडवाइसर (Budweiser), कोरोना (Corona), हेनेकेन (Heineken), गिनेस (Guiness), सैम्यूअल एडम्स (Samuel Adams), मिलर (Miller), कूर्स (Coors), फ़ोस्टर (Fosters) और कार्ल्सबर्ग (Carlsberg)।

भारत में किंगफ़िशर, हेवर्ड्स, थंडरबोल्ट, गोल्डन ईगल, कल्यानी ब्लैक लेबल, गॉडफादर, फ़ोस्टर (ऑस्ट्रेलिया) और कार्ल्सबर्ग (डेन्मार्क) इत्यादि ब्रान्ड्स बाज़ार में उपलब्ध हैं। विभिन्न प्रदेशों मे कर भिन्नता के कारण 650 ml की बोतल का दाम 40 से 90 रुपये तक होता है।

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