Category Archives: व्हिस्की

अन्य व्हिस्कियाँ

अभी तक हमने स्कॉच, आयरिश और अमेरिकन व्हिस्की की विशेषताओं और ब्राँड्स के बारे में जाना। इस पोस्ट में हम इसके अतिरिक्त विश्व में प्रचिलित कुछ व्हिस्कियों के बारे में जानेंगे।

केनेडियन व्हिस्की (Canadian Whisky): कनाडा में पूर्णतया निर्मित व्हिस्की जो कि न्यूनतम तीन वर्षों के लिये ओक की लकड़ी के पीपों में परिपक्वित की गयी हो केनेडियन व्हिस्की कहलाती है। इसे बनाने के लिये मुख्यतः राय ही प्रयुक्त होता है। एक समय विश्व की सबसे बड़ी व्हिस्की कम्पनी सीग्राम (Seagram) का मुख्य केन्द्र क्यूवेक में था, बाद में इसे डायेगो (Diageo) और पेर्नॉड रिकार्ड (Pernod Ricard) ने अभिग्रहित कर लिया। प्रमुख केनेडियन व्हिस्की हैं – ग्लेन ब्रेटन (Glen Breton), अलबर्टा प्रीमियम (Alberta Premium), केनेडियन क्लब (Canadian Club), फ़ोर्टी क्रीक (Forty Creek), क्राउन रॉयल (Crown Royal), ब्लैक वेलवेट (Black Velvet) और वाइज़र्स (Wiser’s)।

जापानी व्हिस्की (Japanese Whisky): जापानी व्हिस्की काफी कुछ स्कॉच से मिलती जुलती है और उसी के तरह बनाई जाती है। कुछ वर्षों पूर्व तक जापानी व्हिस्की केवल घरेलू बाजार तक ही सीमित थी परन्तु आजकल इसने अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। प्रमुख जापानी व्हिस्की हैं – यामाज़ाकी (Yamazaki), हाकुशु (Hakushu), योची (Yoichi), मियागिक्यो (Miyagikyo), कारिजावा (Karuizawa), मार्स शिन्शु (Mars Shinshu)।

भारतीय व्हिस्की (Indian Whisky): भारत में यद्यपि मदिरा पान को सामाजिक स्वीकृति नहीं है तथापि यह व्हिस्की के विश्व में सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है। अधिकतर भारतीय व्हिस्कियों का एक बड़ा भाग शीरे के किण्वन से बनाया जाता है अतः इसे व्हिस्की की स्थान पर रम श्रेणी में रखा जाना चाहिये। परन्तु सामान्यतया इनमें स्वाद के लिये कुछ मात्रा में या तो भारतीय या फिर आयातित अनाजों से बनाई व्हिस्की मिलाई जाती है इसलिये इसे व्हिस्की की श्रेणी में ही रखते हैं। भारत में बहुत सी विदेशी व्हिस्कियों का उत्पादन होता है, इसे इंडियन मेड फ़ॉरेन लिकर (IMFL) की श्रेणी में गिना जाता है। कुछ प्रमुख IMFL व्हिस्की ब्रांड्स हैं – रॉयल चैलेंज(Royal Challange), ब्लेंडर्स प्राइड (Blender’s Pride), रॉयल स्टैग (Royal Stag), इम्पीरियल ब्लू (Imperial Blue), सिग्नेचर (Signature), मैकडावेल नं 1 (Mcdowell’s No.1), बैगपाइपर (Bagpiper), एन्टीक्विटी (Antiquity), डी वाई सी (DYC)। इसके अतिरिक्त भारत में बहुत सी स्कॉच व्हिस्की भी आयात करके बोतलों में भरी जाती हैं इनमें से कुछ प्रमुख हैं – सीग्राम की पासपोर्ट (Passport), 100 पाइपर्स (100 Pipers) और समथिंग स्पेशल (Something Special); हेग (Haig), हेजेस एंड बटलर (Hedges & Butler), ब्लैक एंड व्हाइट (Black & White), ब्लैक डॉग (Black Dog), टीचर्स (Teacher’s), जे एंड बी (J & B), व्हाइट एंड मैके (Whyte & Mackay) इत्यादि। यदि कम्पनियों का दावा माने तो इन स्कॉच में कोई मिलावट नहीं की जाती। विश्वास पर दुनिया कायम है। हाल में ही कुछ सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की भी भारत में बोतल बन्द होने लगी हैं जैसे – डालमोर (Dalmore), आइल ऑफ़ जुरा (Isle of Jura), ग्लेन ड्रूमंड (Glen Drummond) इत्यादि। बंगलूरू स्थित अमृत (Amrut) डिस्टलरी भारत की एक मात्र सिंगल माल्ट व्हिस्की उत्पादक है।

इसके अलावा भी अन्य देशों में व्हिस्की उत्पादन होता है परन्तु उनकी पहुँच अधिकतर सिर्फ उन्हीं देशों तक ही सीमित है।

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अमेरिकन व्हिस्की (American Whiskey)

अंकुरित पिसे हुये अनाज से अमेरिका में बनी व्हिस्की को अमेरिकन व्हिस्की कहते हैं। सम्भवतः स्कॉच के बाद विश्व में सबसे अधिक इसी की मांग है। यह यह मुख्यतः छः प्रकार की होती है – बरबन व्हिस्की (Bourbon Whiskey), राय[1] व्हिस्की (Rye Whiskey), व्हीट व्हिस्की (Wheat Whiskey), टेनेसी व्हिस्की (Tennessee Whiskey), कॉर्न व्हिस्की (Corn Whiskey) और ब्लेंडेड अमेरिकन व्हिस्की (Blended American Whiskey)। अमेरिकन व्हिस्की जलाये गये ओक की लकड़ी के पीपों (charred oak cask) में परिपक्वित की जाती है। यदि परिपक्वन का समय दो वर्ष से अधिक हो तो व्हिस्की के नाम के आगे स्ट्रेट (straight) जुड़ जाता है, जैसे स्ट्रेट बरबन व्हिस्की।

बरबन व्हिस्की: इसमें प्रयुक्त अनाज में कम से कम 51% मक्का होना चाहिये। जिम बीम (Jim Beam), बफ़ेलो ट्रेस (Buffalo Trace), मेकर्स मार्क (Maker’s Mark), वुडफ़ोर्ड रिसर्व (Woodford Reserve) और वाइल्ड टर्की (Wild Turkey) कुछ प्रसिद्ध बरबन व्हिस्की के ब्राँड हैं।

राय और व्हीट व्हिस्की: इसमें कम से कम 51% राय (rye) या गेहूँ (wheat) का होना आवश्यक है। इस किस्म की व्हिस्की प्रायः ब्लेंडेड व्हिस्की में मिलाने के लिये प्रयुक्त होती है और काफ़ी कम मात्रा में स्ट्रेट राय या व्हीट व्हिस्की के रूप में मिलती है। वाइल्ड टर्की (Wild Turkey), वान विंकल (Van Winkle), रिटेन्हाउस (Rittenhouse) इत्यादि प्रमुख राय व्हिस्कियाँ हैं।

कॉर्न व्हिस्की: इसमें 80% से अधिक मक्का होता है। सामान्यतया इसके परिपक्वन की आवश्यकता नहीं होती और यदि इसका परिपक्वन किया भी जाता है तो काफ़ी कम समय के लिये (लगभग छः महीने) वो भी बिना जलाये गये ओक के पीपों में।

अमेरिकन ब्लेंडेड व्हिस्की: इसमें 20% तक बरबन या राय व्हिस्की और शेष 80% औद्योगिक स्प्रिट होती है। इसलिये अमेरिकन ब्लेंडेड व्हिस्की काफ़ी सस्ती होती है।

टेनेसी व्हिस्की: यह अमेरिका के टेनेसी राज्य में बनाई जाती है। इस व्हिस्की को डिस्टिलेशन के बाद परिपक्वन के लिये रखने से पहले मेपल की लकड़ी के कोयले से छानते हैं। जिससे इसमें एक विशेष प्रकार का स्वाद और सुगंध मिश्रित हो जाती है। टेनेसी व्हिस्की के केवल दो ब्राँड्स उपलब्ध हैं – जैक डेनियल्स (Jack Daniel’s) और जॉर्ज डिकेल (George Dickel)।

अमेरिकन व्हिस्कियाँ

अमेरिकन व्हिस्कियाँ

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[1] राय, गेहूँ की तरह का ही परन्तु उससे निकृष्ट अनाज है।

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आयरिश व्हिस्की (Irish Whiskey)

स्कॉच के बाद आयरिश व्हिस्की सबसे अधिक प्रसिद्ध है यद्यपि उपलब्धता और मांग के आधार पर यह अन्य कई व्हिस्कियों से पीछे है। इस पोस्ट में हम आयरिश व्हिस्की की विशेषताओं और प्रमुख ब्राँड्स के बारे में जानेंगे।आयरलैंड में बनी व्हिस्की को आयरिश व्हिस्की कहते हैं। आयरलैंड की स्कॉटलैंड से भौगोलिक समानता के कारण आयरिश व्हिस्की भी लगभग उसी विधि से बनाई जाती है। परन्तु लम्बे समय से ही दोनों एक दूसरे से अच्छी गुणवत्ता की व्हिस्की बनाने का दावा करते रहे हैं। आयरिश व्हिस्की सिंगल माल्ट, सिंगल ग्रेन, और ब्लेंडेड व्हिस्की के अलावा प्योर पॉट स्टिल की किस्म में भी मिलती है। 90 से अधिक स्कॉटिश मद्यनिष्कर्षशालाओं (Distilleries) के विपरीत आयरलैंड में केवल 3 मद्यनिष्कर्षशालायें हैं – न्यू मिडलटन डिस्टिलरी (New Midleton Distillery), ओल्ड बुशमिल्स डिस्टिलरी (Old Bushmills Distillery) और कूली डिस्टिलरी (Cooley Distillery)। पिछली कुछ शताब्दियों में खराब आर्थिक स्थिति के कारण कई मद्यनिष्कर्षशालायें बन्द हो गयीं और अन्य इन तीनों में विलीन हो गयीं।

प्रमुख ब्राँड्स: बुशमिल्स (Bushmills), जेमसन (Jameson), ग्रीन स्पॉट (Green Spot), रेडब्रेस्ट (Redbreast), मिडलटन (Midleton),तुलामोर ड्यू (Tulaamore Dew), माइकल कोलिंस (Michael Collins), इरिन गो ब्रॉ (Erin Go Bragh) और नेपोग  (Knappogue) आदि कुछ प्रसिद्ध आयरिश व्हिस्की हैं।

आयरिश व्हिस्कियाँ

आयरिश व्हिस्कियाँ

आयरिश कॉफ़ी (Irish Coffee) एक प्रसिद्ध कॉकटेल (मद्य मिश्रित पेय) है जो आयरिश व्हिस्की से बनाया जाता है। इसे 4 भाग गर्म कॉफ़ी, 2 भाग आयरिश व्हिस्की और एक भाग क्रीम मिलाकर बनाया जाता है।

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स्कॉच व्हिस्की (Scotch Whisky)

पिछली पोस्ट में हमने जाना कि व्हिस्की अनाजों से बनाई जाती है तथा माल्ट और ग्रेन दो प्रकार की होती है। स्कॉच, आयरिश, केनेडियन और अमेरिकन व्हिस्की विश्व की प्रमुख व्हिस्कियाँ हैं। इस पोस्ट में हम स्कॉच व्हिस्की के बारे और जानकारी प्राप्त करेंगे और इनकी विशेषताओं को जानेंगे।

स्कॉटलैंड में पूर्णतया निर्मित व्हिस्की को स्कॉच व्हिस्की या सिर्फ स्कॉच कहते हैं। स्कॉटलैंड को व्हिस्की उत्पादन के हिसाब से पाँच भागों में बाँटा जा सकता है-

स्पेसाइड (Speyside): उत्तरी स्कॉटलैंड में स्पे नदी के आसपास के इलाक़े को स्पेसाइड कहते हैं। यहाँ सर्वाधिक मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं जिनमें से ग्लेनफ़िडिक[1](Glenfiddich), ग्लेनलिवेट (Glenlivet), बालवीनी (Balvenie), स्पेबर्न (Speyburn), अबर्लोर (Aberlour) और मैकालन (Macallan) प्रमुख हैं।

हाईलैंड (Highland): इस इलाके की प्रमुख मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं डालमोर (Dalmore), डालव्हीनी (Dalwhinnie), ग्लेनमोरेंगी (Glenmorangie), ओबन (Oban), बालब्लेयर (Balblair)। इसके अलावा अनेक द्वीप (आइले को छोड़कर) भी इसी इलाके में गिने जाते हैं। इन द्वीपों के नाम पर ही यहाँ की मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं – अरान (Arran), आइल ऑफ़ जुरा (Isle of Jura), हाइलैंड पार्क (Highland Park), टालिस्कर (Talisker), टॉबरमरी (Tobermory)  और स्कापा (Scapa)।

लोलैंड (Lowland): यहाँ अब केवल तीन मद्यनिष्कर्षशालाऐं ही सक्रिय हैं – ग्लेनकिंची (Glenkinchie), ब्लैडनॉक (Bladnoch) और ऑकेन्टोशन (Auchentoshan)।

आइले (Isle): यहाँ पर आज आठ सक्रिय मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं – बाउमोर (Bowmore), लैफ्रोएग (Laphroaig), लैगावुलिन (Lagavulin)।

कैम्पबेलटाउन (Campbeltown): एक समय पर यहाँ 30 से अधिक मद्यनिष्कर्षशालाऐं थीं परन्तु अब उनमें से तीन ही सक्रिय हैं – ग्लेनगाइल (Glengyle), ग्लेन स्कॉटिया (Glen Scotia) और स्प्रिंगबैंक (Springbank)।

सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की प्रायः मद्यनिष्कर्षशाला के नाम पर ही होती है जबकि ब्लेंडेड व्हिस्की मास्टर ब्लेंडर की कम्पनी के नाम पर होती है। मास्टर ब्लेंडर उस आदमी को कहते हैं जिसने सर्वप्रथम कई मद्यनिष्कर्षशालाओं से अलग अलग प्रकार की व्हिस्की लेकर उन्हें मिलाने के बाद एक अनूठी व्हिस्की को जन्म दिया। व्हिस्की पर अंकित वर्ष उसमें मिलाई गयी सबसे नयी व्हिस्की की उम्र बताता है अर्थात 12 वर्ष पुरानी ब्लेंडेड व्हिस्की में केवल 12 वर्ष या उससे अधिक पुरानी व्हिस्की ही मिली होगी।

सिंगल माल्ट स्कॉच

सिंगल माल्ट स्कॉच

ब्लेंडेड स्कॉच

ब्लेंडेड स्कॉच

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[1] ग्लेन का अर्थ होता है दो पहाड़ियों के बीच किसी नदी की घाटी। अतः जिस भी मद्यनिष्कर्षशाला के नाम में ग्लेन आता है वह ऐसी ही किसी घाटी में स्थित होती है। उदाहरण के लिये ग्लेनफ़िडिक नामक मद्यनिष्कर्षशाला फ़िडिक नदी की घाटी में स्थित है।

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व्हिस्की (Whiskey)

बियर और वाइन के विपरीत व्हिस्की एक आसवित मदिरा है जो जौ (barley), गेहूँ (wheat), मक्का (corn), राइ (rye) इत्यादि अनाजों से बनाई जाती है। सर्वप्रथम व्हिस्की आयरलैंड या स्काटलैंड में सम्भवतः पंद्रहवीं शताब्दी में बनाई गयी थी। इसकी आकस्मिक खोज के बारे में एक कहानी प्रचलित है कि बियर में एल्कॉहल प्रतिशत कम होने के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर काफ़ी मात्रा में पेय ले जाना पड़ता था अतः इससे बचने के लिये किसी ने सोचा कि क्यों न इसे सान्द्रित करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाय। इसी सांद्रित द्रव ने आगे चल कर व्हिस्की का नाम लिया। वैसे आसवन इसके कई शताब्दी पूर्व से बहुत सी दवाओं के संश्लेषण में प्रयोग होता आ रहा था।

व्हिस्की मुख्यतः दो प्रकार की होती है माल्ट व्हिस्की और ग्रेन व्हिस्की। माल्ट व्हिस्की अंकुरित अनाज से बनाई जाती है। इसे बनाने के लिये पहले जौ (या अन्य कोई अनाज) को कुछ समय पानी में भिगाकर अंकुरण के लिये छोड़ देते हैं। समानता के लिये इस दौरान लगातार अनाज को उलटना पलटना पड़ता है। अंकुरण की क्रिया से पूर्व सर्वप्रथम स्टार्च से शर्करा बनती है जो कि बाद में अंकुरण हेतु भोजन का काम करती है। इससे पहले कि शर्करा अंकुरण के लिये प्रयुक्त हो इस प्रकिया को रोक देते हैं। ऐसा करने के लिये अनाज पर गर्म धूम्र प्रवाहित करके इसे सुखा देते हैं। इस धुएँ का व्हिस्की के स्वाद में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। उसके बाद इसमें एंजाइम (यीस्ट) मिलाकर इसे किण्वन के लिये रख देते हैं। किण्वन समाप्ति के बाद इसे पॉट स्टिल या कॉफ़ी स्टिल (सतत) में आसवित करते हैं। आसवन से प्राप्त द्रव को ओक की लकड़ी के बने बेलनाकार पीपों में परिपक्वन या एजिंग हेतु रख देते हैं। एक मानक व्हिस्की को न्यूनतम तीन वर्ष के लिये परिपक्वित किया जाता है। इस दौरान ओक की लकड़ी से बहुत से सुगंध और स्वाद वर्धक तत्व व्हिस्की में मिलते हैं साथ ही वाष्पन के कारण कुछ मात्रा में व्हिस्की का ह्रास भी होता है इसे देवदूतों का हिस्सा या एंजेल्स शेयर कहते हैं। अक्सर वाइन के परिपक्वन के प्रयुक्त पीपे को व्हिस्की के लिये प्रयोग में लाते हैं इससे व्हिस्की में एक विशिष्ट स्वाद आता है। परिपक्वन का समय सामान्यतः व्हिस्की की गुणवत्ता और उसके दाम को निर्धारित करता है। सामान्यतया व्हिस्की 25 से 30 वर्ष तक बेहतर होती रहती है परन्तु उसके बाद इसके गुण कम होने लगते हैं। बिना अंकुरण के अनाज से बनाई जाने वाली व्हिस्की को ग्रेन व्हिस्की कहते हैं यह पूर्णतया मशीनों के द्वारा काफ़ी मात्रा में बनने के कारण सस्ती होती है। परिपक्वन के बाद व्हिस्की को बॉटलिंग प्लांट में भेज दिया जाता है। बोतल में बन्द होने के बाद व्हिस्की का परिपक्वन रुक जाता है अर्थात अपने घर में व्हिस्की की बोतल को लम्बे समय तक रखने का कोई फ़ायदा नहीं।

माल्ट और ग्रेन व्हिस्की को कई प्रकार से मिश्रित कर के उन्हें बेचा जाता है।

वैटेड माल्ट: इसमें कई मद्यनिष्कर्षशालाओं (distilleries) से प्राप्त माल्ट व्हिस्की मिलाई जाती है। इसे प्योर माल्ट, ब्लेंडेड माल्ट या सिर्फ़ माल्ट व्हिस्की भी कहते हैं। जॉनी वाक़र ग्रीन लेबल (15 वर्ष), फ़ेमस ग्रोस (12 वर्ष) तथा इयान मेक्लायड प्रमुख प्रचलित वैटेड माल्ट व्हिस्की हैं।

सिंगल माल्ट व्हिस्की: इसमें केवल एक मद्यनिष्कर्षशाला की माल्ट व्हिस्की प्रयुक्त होती है। जब तक कि बोतल पर सिंगल कैस्क न लिखा हो, इसमें उसी मद्यनिष्कर्षशाला की अलग अलग वर्ष की माल्ट व्हिस्की मिली होती हैं। इनका नाम भी साधारणतया मद्यनिष्कर्षशाला के नाम पर ही होता है। ग्लेनलिवेट और ग्लेनफ़िडिक सबसे अधिक बिकने वाली सिंगल माल्ट व्हिस्की हैं।

ब्लेंडेड व्हिस्की: इसमें अलग अलग मद्यनिष्कर्षशालाओं की माल्ट और ग्रेन व्हिस्की मिश्रित होती हैं। यदि बोतल पर सिर्फ़ स्कॉच या आयरिश व्हिस्की लिखा हो तो सम्भवतः वह ब्लेंडेड व्हिस्की ही होगी। शिवाज़ रीग़ल, जॉनी वाक़र ब्लैक लेबल, बैलेन्टाइन्स और फ़ेमस ग्रोस कुछ प्रमुख ब्लेंडेड व्हिस्की हैं।

कैस्क स्ट्रेंथ: यह किस्म सबसे दुर्लभ होती है और केवल अच्छी अर्थात महँगी व्हिस्की ही इस रूप में मिलती हैं। इसमें पीपे (कैस्क) से निकाली गयी व्हिस्की को सीधे बिना पानी मिलाये पैक किया जाता है इसलिये इसमें एल्कॉहल प्रतिशत भी अधिक होता है।

इसके अलावा प्योर पॉट स्टिल व्हिस्की में आसवन के लिये केवल पॉट स्टिल प्रयुक्त होता है।

स्कॉटलैंड एक प्रमुख व्हिस्की उत्पादक देश है और वहाँ पर बनाई गयी व्हिस्की को स्कॉच (Scotch) कहते हैं, इसके अलावा आयरलैंड और अमेरिका और कनाडा भी व्हिस्की के प्रमुख उत्पादक हैं जहाँ की व्हिस्की को क्रमशः आयरिश व्हिस्की, अमेरिकन व्हिस्की और केनेडियन व्हिस्की कहते हैं। यहाँ पर एक ध्यान देने योग्य बात यह है कि स्कॉच और केनेडियन व्हिस्की के ऊपर व्हिस्की की स्पेलिंग Whiskey के स्थान पर Whisky लिखी होती है जिसका प्रयोग व्हिस्की की इन किस्मों के प्रमाणन में किया जा सकता है।[1]

इसमें एल्कॉहल प्रतिशत 30 से 65% तक हो सकता है, परन्तु सामान्यतया यह 40-43% होता है। भारत में निर्मित ग्रेन व्हिस्की की एक बोतल (750 ml) का दाम 200 रुपये से 1000 रुपये तक होता है जबकि एक आयातित 21 वर्ष पुरानी स्कॉच का दाम 4,000 रुपये से 10,000 रुपये या और अधिक हो सकता है। विभिन्न स्थानों पर निर्मित व्हिस्की के बारे में और अधिक जानकारी अगले पोस्ट में।

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[1] पहले व्हिस्की की स्पेलिंग whisky ही होती थी। परन्तु 18 वीं सदी में कॉफ़ी स्टिल के आविष्कार के बाद बाजार बहुत सी निकृष्ट स्कॉच व्हिस्कियों से भर गया। उस समय आयरिश और अमेरिकन व्हिस्की उत्पादकों ने अपनी पॉट स्टिल की व्हिस्की की उत्कृष्टता जताने के लिये उस पर एक अतिरिक्त e के साथ whiskey लिखना शुरू कर दिया।

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