बियर के प्रकार

बियर के प्रकार या सही मायने में इसे शैली कहें तो मुख्यतः दो भागों में बाँट सकते हैं। एल (Ale) और लागर (Lager)। जैसा कि मैनें बियर पर अपनी पहली पोस्ट में भी लिखा था कि एल ऊपरी किण्वन करने वाले यीस्ट (top fermenting yeast) से बनाई जाती है जबकि लागर नीचले किण्वन करने वाले यीस्ट (Bottom fermenting yeast) से बनाई जाती है। बड़ी मात्रा में औद्योगिक स्तर पर बनाई जा सकने के कारण लागर बीयर सस्ती और अधिक प्रचलित होती है। इसके विपरीत एल बियर साधारणतः छोटे स्तर पर बनाई जाती है और अपेक्षाकृत महंगी होती है। यह वर्गीकरण तो हुआ बियर बनाने वाले यीस्ट के आधार पर। इन दोनों ही प्रकार की बियर में बनाने की विधि, रंग, स्वाद, अवयव, इतिहास और मूल स्थान के कारण और कई विविधतायें पायी जाती हैं। इस पोस्ट में हम बियर की इन्ही विविधताओं के बारे में जानते हैं।

कुछ प्रमुख एल हैं – ब्राउन एल (Brown Ale), पेल एल (Pale Ale), पोर्टर (Porter), स्टाउट (Stout), बार्ली वाइन (Barley Wine), बेल्जियन ट्रिपल (Belgian Trippel), बेल्जियन डबल (Belgian Dubbel) और व्हीट बियर (Wheat beer)।

प्रमुख लागर हैं – अमेरिकन स्टाइल लागर (American-style lager), बॉक (Bock), डंकल (Dunkel), हेलेस (Helles), ऑक्टोबरफ़ेस्टबीयर (Oktoberfestbier), पिल्ज़नर (Pilsner), श्वार्ज़बीयर (Schwarzbier) और वियना लागर (Vienna lager)।

इसके अलावा बेल्जियन लैम्बिक (Belgian Lambic), स्टीम बियर (Steam Beer), फ्रूट और वेजिटेबल बियर, हर्ब्स और स्पाइस्ड बियर इत्यादि कुछ अन्य प्रकार की बियर हैं।

इसके अलावा बियर शब्दावली में दो और नाम प्रसिद्ध हैं ड्रैफ़्ट बियर (Draught Beer) और क्राफ़्ट बियर (Craft Beer)। ड्रैफ़्ट बियर बड़े बंद बर्तन, जिसे केग (Keg) कहते हैं, में लगे नल (tap) से निकाल कर पी जाती है। अत: सामान्यतः बार या पार्टी में देखी जाती है। छोटी ब्र्यूवरी में सीमित मात्रा में बनी बियर को क्राफ़्ट बियर कहते हैं।

आने वाली पोस्टों में इस पोस्ट में बताई गयी कुछ बियर के बारे में और जानकारी लेंगे।

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3 टिप्पणियाँ

Filed under बियर

3 responses to “बियर के प्रकार

  1. बहुत आभार इस जानकारी का 🙂
    कुछ लोगों का कहना है कि कैग से बीयर निकालने के लिये Compressed CO2 के प्रयोग से बीयर के स्वाद में परिवर्तन हो जाता है। मेरे एक मित्र अभी लंदन से लौटे हैं और बडे प्रभावित हैं कि वहाँ Hand Held Pump के माध्यम से वायु का प्रयोग किया जाता है जिससे बीयर (Specially Ales) का स्वाद बरकरार रहता है। मैं सोच रहा था कि CO2 के स्थान पर नाईट्रोजन का प्रयोग किया जा सकता है कि नहीं?

    तुम्हारी क्या राय है?

  2. कार्बन डाई ऑक्साइड के प्रयोग से निश्चित रूप से स्वाद में परिवर्तन होता है जो कि बहुत से लोगों को पसन्द नहीं पर इसे प्रयोग करने का सबसे बड़ा फायदा है कि यह बियर में सभी प्रकार की जैविक क्रियाओं को रोक देती है (लाशातालिये का नियम याद हो शायद) जबकि यदि वायु का प्रयोग किया जाय तो उसमें उपस्थित ऑक्सीजन बियर को अधिक समय टिकने नहीं देगी। परन्तु बार (Bar) में जहाँ एक केग एक – दो दिनों में निपट जाता हो यह एक सस्ता और सरल उपाय है। नाइट्रोजन जैसी कोई अक्रिय गैस सैद्धान्तिक रूप से प्रयोग तो की जा सकती है परन्तु उसके कारण बियर का दाम बढ़ जायेगा।

    स्माइली का मतलब समझ नहीं आया। 🙂

  3. बडी गहरी जानकारियां लेकर आए हैं।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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