सुरा या मीड (Mead)

शहद से बनी मदिरा को सुरा या मीड (Mead) कहते हैं। क्योंकि शहद सम्भवत: मानव को ज्ञात प्रथम संतृप्त शर्करा स्रोत था अतः सुरा भी मानव द्वारा बनायी गयी सम्भवतः प्रथम मदिरा थी। ॠगवेद से लेकर प्राचीन यूनानी सभ्यताओं में इसका उल्लेख मिलता है। जहाँ प्राचीन काल में लगभग सभी सभ्यताओं में यह बहुत प्रचलित थी वहीं आज इसका चलन बहुत ही कम केवल नाम मात्र को रह गया है। इसका एक कारण शहद की प्रचुर मात्रा में अनुपलब्धता भी है। आज अधिकतर लोग इसे घर में ही बनाते हैं जोकि अपेक्षाकृत काफी सरल भी है। इसे बनाने के लिये शहद को पानी में घोलकर इसका किण्वन कराते हैं और अक्सर स्वाद वृद्धि के लिये इसमें मसाले और कुछ फल मिलाये जाते हैं। यह एक प्रकार की वाइन ही है जिसमें एल्कॉहल 10 से 18 प्रतिशत तक हो सकता है।

घर पर सुरा बनाने की विधि

आवश्यक सामग्री: शहद (2 कप), मीड यीस्ट (1 चम्मच), शुद्ध जल (8 कप), नींबू (2 नींबू का रस), स्वादानुसार मसाले (अदरक, लौंग, इलाइची, दालचीनी, जायफल आदि)

सर्वप्रथम मीड या वाइन यीस्ट को 1/4 कप शहद, 1 कप शुद्ध जल और 2 नींबू के रस के मिश्रण में अच्छी तरह से मिलाकर किसी बड़े मुँह के जार में 24 घंटे के लिये छोड़ दें। जार को बन्द न करें केवल किसी साफ कपड़े से ढक दें। ऐसा करने से यीस्ट ऑक्सीजन की उपस्थिति में अपनी जनसंख्या बढ़ाता है और नींबू का रस अम्लीय वातावरण बनाता है ताकि अन्य बैक्टीरिया न पनप सकें। अगले दिन शेष शहद और पानी को मिलाकर उबालें और अच्छी तरह से मिलने दें। ऊपर आये झाग को हटाते रहें इसमें शहद में उपस्थित वैक्स होता है। जब यह मिश्रण बिल्कुल साफ हो जाय इसे ठंडा होने दें। अब इसमें यीस्ट का मिश्रण और स्वादानुसार मसाले मिलाकर किण्वन के लिये विशिष्ट वाइन कारबॉय में रख दें। इस जार में ऐसी व्यवस्था होती है कि किण्वन के समय बनने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड गैस तो इससे बाहर निकलती रहती है परन्तु बाहर की ऑक्सीजन अन्दर नहीं जा पाती। ऑक्सीजन की उपस्थिति में यीस्ट एल्कॉहल नहीं बनाता है। 2 से 3 माह में किण्वन पूरा हो जाता है।

विस्तार में जानकारी के इस लिंक पर जायें।

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5 टिप्पणियाँ

Filed under मदिराओं के प्रकार

5 responses to “सुरा या मीड (Mead)

  1. पहली बार आपका ब्लोग देखा। नहीं जानता था कि ऐसे विषय पर भी इतनी संजीदगी से लिखा जा सकता है।

    धन्यवाद आपकी प्रविष्टि व ब्लोग के लिये।

  2. शायद इस इसी तरह का अल्कोहल आयुर्वेदिक दवाईयों[syrups] में मिलाया जाता है.
    बिल्कुल अलग तरह की जानकारी के लिए धन्यवाद.
    कुछ बातें जानना चाहूंगी-वाईन में अधिकतम कितने प्रतिशत अल्कोहल होता है?
    ब्रीज़र्स ,वाईन और बियर में क्या अन्तर है?क्योंकि तीनो में अल्कोहल की मात्रा लगभग एक सी होती है.
    क्या इनके बनाए की प्रक्रिया के ऊपर निर्भर हैं या..बनाने में इस्तमाल हुए पदार्थ पर?
    नॉन-अल्कोहोलिक बियर को बियर क्यूँ कहते हैं?क्या इस से भी स्नायु तंत्र पर असर पड़ता है?
    आभार सहित.

  3. साधारण वाइन में 10 से 15 % तक एल्कॉहल होता है जबकि कुछ फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन में यह 25% तक हो सकता है। मदिराओं का वर्गीकरण उन्हें बनाने की विधि के आधार पर किया जाता है। इस आधार पर मदिरायें तीन प्रकार की होतीं हैं – बियर, वाइन और स्पिरिट। अधिक जानकारी के लिये मदिरा, बियर और वाइन पर मेरी पूर्व प्रविष्टियाँ देखें।

    ब्रीज़र बकार्डी रम (आसवित मदिरा) और फलों के रस का मिश्रण होता है जिसे एक प्रकार का कॉकटेल कहा जा सकता है। जबकि वाइन और बियर अनासवित मदिरायें हैं। वाइन में जहाँ मातृद्रव का लगभग पूरा किण्वन किया जाता है जिससे पूरी कार्बन डाई ऑकसाइड निकल जाती है वहीं बियर में किण्वन को पूरा नहीं होने देते जिससे वह कार्बोनेटेड होती है और उसमें एल्कॉहल भी वाइन से कम होता है।

    बिना एल्कॉहल वाली बियर या फ़्रूट बियर भी लगभग बियर बनाने की विधि से ही बनाई जाती है केवल इसके किण्वन का समय अपेक्षाकृत काफी कम (24 से 48 घंटे) होता है अतः सार्थक मात्रा में एल्कॉहल नहीं बन पाता। इन बियर में भी अल्प मात्रा में (0.1 से 0.5% तक) एल्कॉहल होता है। इतने कम एल्कॉहल की बियर से स्नायु तंत्र पर प्रभाव पड़ने के लिये करीब 1 गैलन (लगभग 4 लीटर) बियर पीने की आवश्यकता होगी जोकि लगभग असंभव है। और यदि कोई इतनी फ़्रूट बियर पी भी ले तो स्नायु तंत्र से पहले उसका पाचन तंत्र और उत्सर्जन तंत्र प्रभावित हो जायेंगे।

  4. अंकुर जी,
    आप ने शंका का समाधान किया.
    धन्यवाद.

  5. Jitendra

    Aachi jankari hai likhte rahiye.

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