एल्कॉहलीय प्रूफ (Alcoholic proof)

एल्कॉहलिक प्रूफ किसी एल्कॉहलिक पेय में एल्कॉहल की मात्रा निर्धारित करने का एक पैमाना है। 18वीं सदी से 1 जनवरी 1980 तक यही पैमाना मुख्यतः प्रचलन में था। यद्यपि आजकल लगभग सभी देशों में मदिरा में एल्कॉहल को आयतन प्रतिशत (Alcohol By Volume / ABV) में मापा जाता है तथापि बहुत से मदिरा उत्पादक इस पैमाने को भी साथ में प्रयोग करते हैं।

18वीं सदी के यूरोपीय मदिरा व्यापारी रम में एल्कॉहल की मात्रा जाँचने के लिये एक परीक्षण करते थे। वे थोड़े से बारूद (gunpowder) को रम से गीला करके उसे जलाकर देखते थे, यदि बारूद जल जाता था तो उस मदिरा को सत्यापित मदिरा या प्रूव्ड स्पिरिट (proved spirit) कहते थे। न्यूनतम मात्रा में एल्कॉहल वाली मदिरा जो बारूद को जलने देती है उसे 100 डिग्री प्रूफ (100 o proof) स्पिरिट कहते हैं। बाद में ये पाया गया कि इस मदिरा में एल्कॉहल का आयतन प्रतिशत 57.15% होता है जो कि लगभग 7 भाग मदिरा में 4 भाग एल्कॉहल के बराबर है। अत: 100% शुद्ध एल्कॉहल 175 डिग्री प्रूफ स्पिरिट हुआ। अर्थात किसी भी मदिरा का डिग्री प्रूफ उसमें एल्कॉहल के आयतन प्रतिशत को 1.75 से गुणा करके निकाला जा सकता है। उदाहरण के लिये 42.8% एल्कॉहल वाली मदिरा 75 डिग्री प्रूफ स्पिरिट होगी।

अमेरिका में प्रयोग होने वाले एल्कॉहलिक प्रूफ पैमाने में मदिरा के आयतन एल्कॉहल प्रतिशत को 2 से गुणा किया जाता है और इसे केवल प्रूफ स्पिरिट कहा जाता है (डिग्री का प्रयोग नहीं करते)। उदाहरण के लिये 80 प्रूफ स्पिरिट में 40% एल्कॉहल होगा।

इसके अतिरिक्त कई बार एल्कॉहल के आयतन प्रतिशत को डिग्री गेलुसाक (oGL) भी कहा जाता है। उदाहरण के लिये शिवाज़ रीगल की बोतल पर लिखे 40oGL का अर्थ है कि उसमें 40% एल्कॉहल है।

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