वाइन टेस्टिंग (Wine Tasting)

भोजन का मुख्य उद्देश्य यद्यपि क्षुधा निवारण ही होता है फिर भी स्वादिष्ट भोजन का अनुभव और उसे ग्रहण करने का एक तरीका होता है। यह बात वैज्ञानिक रूप से सत्यापित है कि यदि भोजन की सुगन्ध और स्वाद लेते हुये उसका भोग किया जाय तो सुपाच्य होता है। इसी प्रकार वाइन का रसास्वादन या वाइन टेस्टिंग भी वर्षों में विकसित एक तरीका है जिससे किसी भी वाइन या अन्य मदिरा का पूर्ण आनन्द उठाया जा सकता है। इस बात का कोई नियम नहीं है कि कौन सा स्वाद अच्छा या बुरा है क्योंकि स्वाद एक व्यक्तिगत आंकलन और निर्णय होता है। परन्तु स्वाद का पूर्ण अनुभव लेने के लिये एक मानक विधि होती है जिसमें वाइन के रसास्वादन के समय ध्यान देने योग्य चीजों और कुछ सूचक स्वादों के बारे में बताया जाता है। प्रस्तुत है इस विधि के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी।

वाइन टेस्टिंग को चार भागों में बाँटा जा सकता है। रंग का आंकलन, पीने से पूर्व सुगन्ध का अनुभव, मुँह में स्वाद का अनुभव और निगलने के बाद मुँह का स्वाद। इन चारों मिला जुना अनुभव पी जाने वाली वाइन का पूर्ण स्वाद नियत करता है। वाइन का सबसे अच्छा स्वाद लेने हेतु उसका तापमान वातावरण के ताप से थोड़ा कम लगभग 5 से 18oC के बीच होना चाहिये। अक्सर वाइन टेस्टिंग सत्रों में लोग वाइन को निगलते नहीं हैं, स्वाद लेने के बाद थूक देते हैं ताकि उनका वाइन के स्वाद के बारे में निर्णय वाइन से होने वाले नशे से प्रभावित न हो। एक बार स्वाद निर्धारण के बाद अपनी पसंदीदा वाइन का आराम से लुत्फ़ उठाया जा सकता है।

वाइन का रंग दर्शन: सबसे पहले 100-150 मिली लीटर वाइन को उपयुक्त गिलास में निकालते हैं। उसके बाद उसे गिलास में थोड़ा हिलाकर उसके रंग, पारदर्शिता और गाढ़ेपन की परख करते हैं। यदि यह रेड वाइन है तो इसका रंग मरून, सुर्ख लाल, जामुनी, भूरा लाल, या ईंट के रंग सा हो सकता है। यदि यह व्हाइट वाइन है तो इसका रंग हल्का पीला, हल्का हरा, हल्का अम्बर या पूर्णतया रंगहीन हो सकता है। रंग का सर्वोत्तम परीक्षण सफेद पृष्ठभूमि पर होता है, इसलिये गिलास को सफेद टेबल क्लाथ, या नैपकिन के आगे रखकर देखा जाना चाहिये। रंग से वाइन बनाने में प्रयुक्त अंगूर की किस्म, वाइन की उम्र और उसके परिपक्वन के बारे में अनुमान लगाया जाता है। हैवी वाइन जिसमें सामान्यतः एल्कॉहल, एसिड, टैनिन और/या अर्क अधिक मात्रा में होते हैं, का रंग गहरा होता है। मीठी वाइन की श्यानता अधिक होने की वजह से गिलास में उसे हिलाने पर वह गिलास की दीवारों पर अधिक देर से फिसलती है। समय के साथ सामान्यतया सभी वाइन की पारदर्शिता / निर्मलता बढ़ती है।

वाइन की सुगन्ध: वाइन की सुगन्ध लेने का सही तरीका है कि गिलास के मुँह के पास नाक ले जाकर एक लम्बी साँस ली जाय। वाइन की सुगन्ध या अरोमा (aroma) से ओक, बेरी, फूलों, वनीला, खट्टेपन की मिली जुली महक आती है जो वाइन के स्वाद का एक महत्त्वपूर्ण पूरक अंग होता है। सुगन्ध के सभी अवयवों को परखने के लिये अक्सर कई बार वाइन की सुगन्ध ली जाती है।

वाइन का स्वाद: सुगन्ध लेने के बाद वाइन का एक छोटा घूंट मुँह में लेकर उसे जीभ की सहायता से मुँह में अच्छी तरह से हिलाते हैं जिससे कि जीभ की स्वाद संवेदी कोशिकाओं को स्वाद आंकलन के लिये उचित समय मिल सके। स्वाद संवेदन को दो चरण में बाँटा जा सकता है। प्रथम चरण, जिसे आक्रमण चरण (Attack Phase) कहते है, में वाइन की एल्कॉहल मात्रा, खट्टापन और मिठास का अनुभव होता है। एक संतुलित वाइन में इनमें से कोई भी स्वाद दूसरों पर हावी नहीं होना चाहिये। इस चरण में वाइन की जटिलता (complexity) और तीव्रता (intensity) के बारे में पता चलता है। जैसे कि वाइन लाइट है या हैवी, मीठी है या शुष्क, कड़क है या मुलायम आदि परन्तु इस चरण में वाइन मे से फलों या मसालों का स्वाद आना जरूरी नहीं है। दूसरे चरण, जिसे विकास चरण (Evolution Phase) कहते हैं, में वाइन का वास्तविक स्वाद पता चलता है। रेड वाइन में बेर, आलूबुखारा, अञ्जीर आदि फलों और कालीमिर्च, लौंग, दालचीनी आदि मसालों या ओक और देवदार की लकड़ी और धुँए की महक का अनुभव मिल सकता है। जबकि व्हाइट वाइन में सेब, नाशपाती, और खट्टे फलों के स्वाद के साथ शहद, मक्खन और जड़ी बूटियों का अनुभव मिल सकता है। इसके बाद वाइन को निगल या थूक देते हैं।

वाइन पीने के बाद मुँह का स्वाद: ये वह चरण है जब वाइन का स्वाद अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचता है। इसमें यह देखा जाता है कि निगलने के बाद कितनी देर तक वाइन का स्वाद मुँह में रहता है। क्या वाइन लाइट बॉडी थी (जैसे पानी) या फिर हैवी बॉडी (जैसे दूध जैसी गाढ़ी)? क्या वाइन का स्वाद अभी भी मुँह के पिछले भाग और गले में लिया जा सकता है? क्या स्वाद देर तक मुँह में रहा या फिर कुछ पल के लिये ही रहा? वाइन की अन्तिम छाप क्या थी – फल, मक्खन या ओक? और सबसे महत्त्वपूर्ण क्या आप दूसरा घूँट लेना चाहते हैं या फिर वाइन अधिक कड़वी थी?

अन्त में इस बात का निर्धारण किया जाता है कि वाइन ने आप पर क्या छाप छोड़ी? कुल मिलाकर आपको वाइन कैसी लगी? वाइन का खट्टापन जो उसमें उपस्थित सिरके के कारण होता है, कितना था? क्या वाइन संतुलित थी? और किस प्रकार के भोजन के साथ यह अच्छी लगेगी?

इंटरनेट पर ऐसे कई लिंक ढूँढे जा सकते हैं जिसमें वाइन और भारतीय व्यंजनों के मेल के बारे में वर्णन है।

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1 टिप्पणी

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One response to “वाइन टेस्टिंग (Wine Tasting)

  1. अच्छी जानकारी।
    लिखते रहें।

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