Monthly Archives: दिसम्बर 2008

कॉकटेल (Cocktail)

मिश्रित एल्कॉहलिक पेय को कॉकटेल कहते हैं। इसमें एक या अधिक एल्कॉहलिक पेय (मदिरा) के साथ फलों का रस, सोडा, चीनी, बिटर्स[1] और मसाले मिले होते हैं। कॉकटेल सामान्यतया अधिक स्वादिष्ट और मीठे पेय होते हैं जो अक्सर पार्टी और उत्सवों में पिये जाते हैं। इन्हें बनाने में अपेक्षाकृत सस्ती मदिराओं का प्रयोग होता है और इनसे पर्याप्त मात्रा में जलीय और पोषक तत्व मिले होने के कारण इनके पीने से डीहाइड्रेशन और हैंगओवर की सम्भावना अपेक्षाकृत कम होती है।

कॉकटेल बनाते समय आप अपने स्वादानुसार प्रयोग करके अनेकों नये पेय बना सकते हैं। परन्तु इस प्रक्रिया में गलतीयों से बचने के लिये सबसे अच्छा तरीका है कि पहले आप प्रचलित कॉकटेल के बारे में जानिये और उससे मिलता जुलता आपको अच्छा लगने वाला मिश्रण तैयार कीजिये।

प्रस्तुत है सबसे अधिक प्रचलित और अपेक्षाकृत आसानी से बनाये जा सकने वाले 5 कॉकटेल।

मार्टीनी

मार्टीनी

1. मार्टीनी (Martini)

सामग्री: जिन[2] (Gin), ड्राई वरमूथ[3] (Dry Vermouth), जैतून (Olive)/नींबू का छिलका

गिलास: मार्टीनी ग्लास

1.5 आउन्स[4] (45 मिली) जिन और 0.75 आउन्स (22 मिली) ड्राई वरमूथ को अच्छी तरह से मिलाकर मार्टीनी ग्लास में जैतून या नींबू के छिलके के साथ परोसें। जिन के स्थान पर इसमें वोडका भी मिला सकते हैं, उस स्थिति में इसे वोडका मार्टीनी कहते हैं।

मोहीटो

मोहीटो

2. मोहीटो (Mojito)

सामग्री: लाइट रम, लाइम जूस, चीनी, क्लब सोडा, पोदीना पत्ती

गिलास: हाईबॉल ग्लास

सबसे पहले पोदीना पत्ती, दो चम्मच चीनी और थोड़ा सोडा वाटर मिलाकर चीनी को घुलने दें। अब उसमें बर्फ के टुकड़े, दो या तीन आउन्स लाइट रम और एक आउन्स लाइम जूस मिलाकर अच्छी तरह से हिलायें। अब पिसी हुई बर्फ से भरे हाईबाल ग्लास में इस मिश्रण को सोडे के साथ डालकर उसके ऊपर 2-3 पोदीना पत्ती के साथ परोसें।

पीना कोलाडा

पीना कोलाडा

3. पिना कोलाडा (Pina Colada)

सामग्री: लाइट रम, नारियल दूध (Coconut milk) या मालिबू रम, अनन्नास (Pineapple)

गिलास: हाईबॉल या कॉलिंस ग्लास

नारियल दूध ताजे नारियल के गूदे को बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसने के बाद छानकर बनाया जाता है। यह नारियल पानी से अलग है। तो मोहीटो बनाने के लिये 3 आउन्स लाइट रम में 3 बड़े चम्मच नारियल दूध और 3 बड़े चम्मच अनन्नास के टुकड़े मिलाकर उसे मिक्सी में बर्फ के साथ बहुत कम समय के लिये पीसें और फिर गिलास में कुछ अनन्नास के टुकड़ों के साथ परोसें। नारियल दूध के स्थान पर मालिबू रम का भी प्रयोग किया जा सकता है। यह एक नारियल के स्वाद की लाइट रम है। इससे पिना कोलाडा बनाने के लिये दो भाग मालिबू रम में दो भाग अनन्नास का रस और एक भाग दूध या मलाई मिलाकर उसे बर्फ के साथ पीसते हैं।

मार्गरीटा ग्लास

मार्गरीटा ग्लास

4. मार्गरीटा (Margarita)

सामग्री: टेक़ीला[5], ट्रिपल सेक[6], लाइम जूस और नमक

गिलास: मार्गरीटा ग्लास

मार्गरीटा ग्लास के किनारे (rim) पर लाइम जूस लगा कर उसे नमक में डुबाइये जिससे नमक उसके किनारों पर चिपक जायेगा। अब 1.5 आउन्स टेक़ीला, 0.5 आउन्स ट्रिपल सेक और 1 आउन्स लाइम जूस मिलाकर अच्छी तरह से हिलाइये। अब इसे नमक लगे मार्गरीटा ग्लास में डालकर परोसें।

ब्लडी मेरी

ब्लडी मेरी

5. ब्लडी मेरी (Bloody Mary)

सामग्री: वोडका, टमाटर का रस, वॉस्टरशियर सॉस[7], टबास्को सॉस[8], नींबू, नमक, पिसी काली मिर्च

गिलास: ओल्ड फ़ैशन्ड ग्लास या हाईबॉल ग्लास

1.5 आउन्स वोडका, 3 आउन्स टमाटर का रस, आधे नींबू का रस, आधा चम्मच वॉस्टरशियर सॉस और 2-3 बूँद टबास्को सॉस मिलाकर अच्छी तरह से मिलायें। अब लोबॉल ग्लास के किनारों पर नींबू का रस लगाकर उस पर नमक चिपकायें और मिश्रण को गिलास में डालकर उसमें स्वादानुसार नमक और पिसी हुयी काली मिर्च के साथ परोसें।

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। वर्ष 2009 आपके जीवन में सुख, समृद्धि और अपार खुशियाँ ले कर आये।

__________

[1] बिटर जड़ी-बूटियों और फलों के रस के मिश्रण से बने एल्कॉहलिक पेय को कहते हैं। इसका स्वाद कड़वा या कड़वा मीठा होता है। इसका प्रयोग कॉकटेल में एक अलग प्रकार का स्वाद लाने में होता है।
[2] जिन (Gin) जूनिपर बेरी और अनाजों से बनाई जाने वाली रंगहीन स्प्रिट है।
[3] वरमूथ (Vermouth) इटली की प्रसिद्ध फ़ोर्टीफ़ाइड वाइन है जिसमें सुगन्धित जड़ी बूटियाँ और मसाले मिले होते हैं। बिना मीठी वरमूथ को ड्राई वरमूथ कहते हैं।
[4] एक आउन्स में लगभग 30 मिली लीटर होते हैं (1 US fluid ounce = 29.5735296 ml)
[5] टेक़ीला या टक़ीला (Tequila) मैक्सिको में अगेव नामक पौधे से बनाई जाने वाली मदिरा है।
[6] ट्रिपल सेक (Triple sec) एक सन्तरे के स्वाद की मीठी मदिरा अर्थात लिकूर (liqueur) है। जो सूखे सन्तरे के छिलकों को ब्रांडी या लाइट रम में डालकर बनाया जाता है।
[7] वॉस्टरशियर सॉस (Worcestershire sauce) लहसुन, इमली, सोय सॉस, प्याज, सिरका, शीरा और नींबू आदि से मिलकर बना होता है। इसे सर्वप्रथम अंग्रेजों ने भारत में बनाया था और इसका नाम एक ब्रिटिश काउन्टी के नाम पर है जहाँ यह सबसे पहले बोतल बंद हुआ।
[8] टबास्को सॉस (Tabasco sauce) अमेरिका में पायी जाने वाली एक प्रकार की विशेष लाल मिर्च (टबास्को) और सिरके से बनाया जाता है।

2 टिप्पणियाँ

Filed under कॉकटेल

वाइन टेस्टिंग (Wine Tasting)

भोजन का मुख्य उद्देश्य यद्यपि क्षुधा निवारण ही होता है फिर भी स्वादिष्ट भोजन का अनुभव और उसे ग्रहण करने का एक तरीका होता है। यह बात वैज्ञानिक रूप से सत्यापित है कि यदि भोजन की सुगन्ध और स्वाद लेते हुये उसका भोग किया जाय तो सुपाच्य होता है। इसी प्रकार वाइन का रसास्वादन या वाइन टेस्टिंग भी वर्षों में विकसित एक तरीका है जिससे किसी भी वाइन या अन्य मदिरा का पूर्ण आनन्द उठाया जा सकता है। इस बात का कोई नियम नहीं है कि कौन सा स्वाद अच्छा या बुरा है क्योंकि स्वाद एक व्यक्तिगत आंकलन और निर्णय होता है। परन्तु स्वाद का पूर्ण अनुभव लेने के लिये एक मानक विधि होती है जिसमें वाइन के रसास्वादन के समय ध्यान देने योग्य चीजों और कुछ सूचक स्वादों के बारे में बताया जाता है। प्रस्तुत है इस विधि के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी।

वाइन टेस्टिंग को चार भागों में बाँटा जा सकता है। रंग का आंकलन, पीने से पूर्व सुगन्ध का अनुभव, मुँह में स्वाद का अनुभव और निगलने के बाद मुँह का स्वाद। इन चारों मिला जुना अनुभव पी जाने वाली वाइन का पूर्ण स्वाद नियत करता है। वाइन का सबसे अच्छा स्वाद लेने हेतु उसका तापमान वातावरण के ताप से थोड़ा कम लगभग 5 से 18oC के बीच होना चाहिये। अक्सर वाइन टेस्टिंग सत्रों में लोग वाइन को निगलते नहीं हैं, स्वाद लेने के बाद थूक देते हैं ताकि उनका वाइन के स्वाद के बारे में निर्णय वाइन से होने वाले नशे से प्रभावित न हो। एक बार स्वाद निर्धारण के बाद अपनी पसंदीदा वाइन का आराम से लुत्फ़ उठाया जा सकता है।

वाइन का रंग दर्शन: सबसे पहले 100-150 मिली लीटर वाइन को उपयुक्त गिलास में निकालते हैं। उसके बाद उसे गिलास में थोड़ा हिलाकर उसके रंग, पारदर्शिता और गाढ़ेपन की परख करते हैं। यदि यह रेड वाइन है तो इसका रंग मरून, सुर्ख लाल, जामुनी, भूरा लाल, या ईंट के रंग सा हो सकता है। यदि यह व्हाइट वाइन है तो इसका रंग हल्का पीला, हल्का हरा, हल्का अम्बर या पूर्णतया रंगहीन हो सकता है। रंग का सर्वोत्तम परीक्षण सफेद पृष्ठभूमि पर होता है, इसलिये गिलास को सफेद टेबल क्लाथ, या नैपकिन के आगे रखकर देखा जाना चाहिये। रंग से वाइन बनाने में प्रयुक्त अंगूर की किस्म, वाइन की उम्र और उसके परिपक्वन के बारे में अनुमान लगाया जाता है। हैवी वाइन जिसमें सामान्यतः एल्कॉहल, एसिड, टैनिन और/या अर्क अधिक मात्रा में होते हैं, का रंग गहरा होता है। मीठी वाइन की श्यानता अधिक होने की वजह से गिलास में उसे हिलाने पर वह गिलास की दीवारों पर अधिक देर से फिसलती है। समय के साथ सामान्यतया सभी वाइन की पारदर्शिता / निर्मलता बढ़ती है।

वाइन की सुगन्ध: वाइन की सुगन्ध लेने का सही तरीका है कि गिलास के मुँह के पास नाक ले जाकर एक लम्बी साँस ली जाय। वाइन की सुगन्ध या अरोमा (aroma) से ओक, बेरी, फूलों, वनीला, खट्टेपन की मिली जुली महक आती है जो वाइन के स्वाद का एक महत्त्वपूर्ण पूरक अंग होता है। सुगन्ध के सभी अवयवों को परखने के लिये अक्सर कई बार वाइन की सुगन्ध ली जाती है।

वाइन का स्वाद: सुगन्ध लेने के बाद वाइन का एक छोटा घूंट मुँह में लेकर उसे जीभ की सहायता से मुँह में अच्छी तरह से हिलाते हैं जिससे कि जीभ की स्वाद संवेदी कोशिकाओं को स्वाद आंकलन के लिये उचित समय मिल सके। स्वाद संवेदन को दो चरण में बाँटा जा सकता है। प्रथम चरण, जिसे आक्रमण चरण (Attack Phase) कहते है, में वाइन की एल्कॉहल मात्रा, खट्टापन और मिठास का अनुभव होता है। एक संतुलित वाइन में इनमें से कोई भी स्वाद दूसरों पर हावी नहीं होना चाहिये। इस चरण में वाइन की जटिलता (complexity) और तीव्रता (intensity) के बारे में पता चलता है। जैसे कि वाइन लाइट है या हैवी, मीठी है या शुष्क, कड़क है या मुलायम आदि परन्तु इस चरण में वाइन मे से फलों या मसालों का स्वाद आना जरूरी नहीं है। दूसरे चरण, जिसे विकास चरण (Evolution Phase) कहते हैं, में वाइन का वास्तविक स्वाद पता चलता है। रेड वाइन में बेर, आलूबुखारा, अञ्जीर आदि फलों और कालीमिर्च, लौंग, दालचीनी आदि मसालों या ओक और देवदार की लकड़ी और धुँए की महक का अनुभव मिल सकता है। जबकि व्हाइट वाइन में सेब, नाशपाती, और खट्टे फलों के स्वाद के साथ शहद, मक्खन और जड़ी बूटियों का अनुभव मिल सकता है। इसके बाद वाइन को निगल या थूक देते हैं।

वाइन पीने के बाद मुँह का स्वाद: ये वह चरण है जब वाइन का स्वाद अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचता है। इसमें यह देखा जाता है कि निगलने के बाद कितनी देर तक वाइन का स्वाद मुँह में रहता है। क्या वाइन लाइट बॉडी थी (जैसे पानी) या फिर हैवी बॉडी (जैसे दूध जैसी गाढ़ी)? क्या वाइन का स्वाद अभी भी मुँह के पिछले भाग और गले में लिया जा सकता है? क्या स्वाद देर तक मुँह में रहा या फिर कुछ पल के लिये ही रहा? वाइन की अन्तिम छाप क्या थी – फल, मक्खन या ओक? और सबसे महत्त्वपूर्ण क्या आप दूसरा घूँट लेना चाहते हैं या फिर वाइन अधिक कड़वी थी?

अन्त में इस बात का निर्धारण किया जाता है कि वाइन ने आप पर क्या छाप छोड़ी? कुल मिलाकर आपको वाइन कैसी लगी? वाइन का खट्टापन जो उसमें उपस्थित सिरके के कारण होता है, कितना था? क्या वाइन संतुलित थी? और किस प्रकार के भोजन के साथ यह अच्छी लगेगी?

इंटरनेट पर ऐसे कई लिंक ढूँढे जा सकते हैं जिसमें वाइन और भारतीय व्यंजनों के मेल के बारे में वर्णन है।

1 टिप्पणी

Filed under गैर वर्गीकृत

मदिरापान के पात्र: भाग 3

अभी तक हमने बियर पीने के गिलासों और तने वाले गिलासों के बारे में जाना। इस पोस्ट में हम मदिरापान के शेष अन्य प्रमुख पात्रों के बारे में जानेंगे।

शॉट ग्लास (Shot glass): यह एक बहुत छोटा गिलास है जिसका आयतन 50-60 मिली होता है। इसका प्रयोग एक घूंट में शीघ्रता से पिये जाने वाली मदिराओं जैसे टेक़ीला आदि को पीने में होता है।

शॉट ग्लास

शॉट ग्लास

ओल्ड फ़ैशन्ड ग्लास (Old-Fashioned glass): इसे लोबॉल ग्लास (lowball glass), व्हिस्की ग्लास (Whisky Glass), रॉक्स ग्लास (rocks glass) या शॉर्ट टम्बलर (short tumbler) भी कहते हैं। इसका आयतन 250-300 मिली और आधार प्रायः मोटा और सपाट होता है। इसका प्रयोग बर्फ़ पर अर्थात ऑन द रॉक्स (on the rocks) व्हिस्की और अन्य स्प्रिट पीने में किया जाता है। इसके अलावा इनका प्रयोग बहुत से कॉकटेल परोसने में भी होता है।

व्हिस्की ग्लास

व्हिस्की ग्लास

हाईबॉल ग्लास (Highball glass): यह एक लम्बा गिलास है जिसका आयतन 250-350 मिली होता है। मुख्यतः यह कॉकटेल परोसने में प्रयुक्त होता है।

हाईबॉल ग्लास

हाईबॉल ग्लास

कॉलिंस ग्लास (Collins glass): यह हाईबॉल ग्लास की अपेक्षा पतला और लम्बा गिलास है जिसका आयतन भी 250-350 मिली होता है। इसे भी कॉकटेल परोसने में प्रयोग करते हैं।

कॉलिंस ग्लास, ब्लैक वेल्वेट कॉकटेल के साथ

कॉलिंस ग्लास, ब्लैक वेल्वेट कॉकटेल के साथ

इसके अतिरिक्त अन्य बहुत से आकार के गिलास मदिरापान में प्रयुक्त होते हैं परन्तु ये सभी मूल रूप से अभी तक बताये किसी न किसी गिलास का ही परिवर्तित रूप होते हैं।

टिप्पणी करे

Filed under ड्रिंकवेयर

मदिरापान के पात्र: भाग 2 (स्टेमवेयर)

पिछली पोस्ट में हमने बियर पीने में प्रयुक्त होने वाले गिलासों के बारे में जाना। आइये इस पोस्ट में स्टेमवेयर या तने वाले गिलासों के बारे में जानते हैं। इन गिलासों की धारण क्षमता प्रायः 150 से 300 मिली तक होती है। गिलास का मुँह अपेक्षाकृत छोटा होता है इस कारण मदिरा की सुगन्ध एकत्रित होकर अधिक आती है। इनके तने का मुख्य उद्देश्य यह है कि गिलास को उसके तने से पकड़ा जाय ताकि न तो मदिरा का तापमान प्रभावित हो और न ही ऊपर के प्याले वाले भाग में उँगलियों के दाग़ लगें जिससे मदिरा का रंग प्रभावित हो। इन गिलासों में अक्सर महँगी मदिरा जैसे वाइन, शेम्पेन, स्कॉच, ब्रांडी और कोनयाक इत्यादि और कॉकटेल पिया जाता है। आकार और आयतन के आधार पर इनके कई प्रकार हो सकते है और इनका नामकरण प्रायः इसमें पी जाने वाली प्राथमिक मदिरा के अनुसार होता है।

वाइन ग्लास (wine glass): वाइन ग्लास सबसे अधिक प्रचलित स्टेमवेयर है। वाइन के प्रकार के आधार पर इसमें कुछ विविधता होती है। नीचे दिये गये चित्र में रेड वाइन, व्हाइट वाइन और शेरी ग्लास (Sherry glass) प्रदर्शित हैं।

रेड वाइन, व्हाइट वाइन और शेरी ग्लास

रेड वाइन, व्हाइट वाइन और शेरी ग्लास

शेम्पेन फ्लूट (Champagne flute): इसमें एक लम्बा तना और पतला प्याला होता है। इसे भी तने से पकड़ा जाता है ताकि मदिरा का तापमान प्रभावित न हो।

शेम्पेन फ्लूट

शेम्पेन फ्लूट

शेम्पेन कूप (Champagne coupe): शेम्पेन कूप या शेम्पेन सॉसर भी एक लम्बे तने वाला शेम्पेन ग्लास है यद्यपि अब यह प्रायः कॉकटेल के लिये ही प्रयोग में आता है। इसके बारे में यह मिथक प्रचलित है कि इसका साँचा 18 वीं सदी की फ्रांसीसी रानियों (मेरी एंट्वनेट, ज़ोज़ेफ़ीन डा बोआरने, मडाम डा पॉम्पाडोर आदि) के स्तनों से ढालकर बनाया गया था। निश्चय ही यह सत्य से काफ़ी दूर है।

शेम्पेन कूप

शेम्पेन कूप

ब्रांडी स्निफ़्टर (Brandy snifter): इसका आयतन लगभग 180 से 250 मिली तक होता है पर एक बार में 100 मिली से कम ही लिया (दिया) जाता है। इसका मुँह और तना अपेक्षाकृत छोटे होते है जिससे के हाथ की गर्मी से ब्रांडी का वाष्पन हो और उसकी सुगन्ध का अनुभव आसानी से किया जा सके।

ब्रांडी स्निफ़्टर

ब्रांडी स्निफ़्टर

ट्यूलिप ग्लास (Tulip glass): इस गिलास का प्याला ट्यूलिप के पत्ते के आकार का होता है। इसका आयतन अपेक्षाकृत अधिक (250-400 मिली) होता है। इसका प्रयोग कुछ सुगन्धित एल बीयर, स्कॉच और कोनयाक पीने में किया जाता है।

ट्यूलिप ग्लास

ट्यूलिप ग्लास

मार्टीनी ग्लास (Martini glass): इसे कॉकटेल ग्लास भी कहते हैं। इसका ऊपर का प्याला शंक्वाकार होता है जिसका ऊर्ध्वकोण लगभग 90o होता है। इसका प्रयोग मार्टीनी[1] और अन्य कॉकटेल परोसने में किया जाता है।

मार्टीनी या कॉकटेल ग्लास

मार्टीनी या कॉकटेल ग्लास

मार्गरीटा ग्लास (Margarita glass): यह शेम्पेन कूप का ही एक रूपान्तरण है जो मार्गरीटा[2] परोसने में प्रयुक्त होता है।

मार्गरीटा ग्लास

मार्गरीटा ग्लास

अगली पोस्ट में हम बचे हुये कुछ और गिलासों के बारे में जानेंगे।

__________

[1] मार्टीनी; वोडका/जिन, वर्मूथ और जैतून से बनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध कॉकटेल है।
[2] मार्गरीटा; टेक़ीला, नींबू और सन्तरे के स्वाद वाले लिकूर (liqueur) ट्रिपल सेक (Triple sec) से बनाया जाने वाला कॉकटेल है।

टिप्पणी करे

Filed under ड्रिंकवेयर

मदिरा पान के पात्र (Drinkware): भाग 1

जिस प्रकार से हम चाय, कॉफ़ी, लस्सी, मिल्क शेक, शर्बत इत्यादि पीने के लिये अलग अलग प्रकार के गिलास या कप प्रयोग में लाते हैं उसी प्रकार से अलग अलग प्रकार की मदिरा पान हेतु भी अलग अलग प्रकार के गिलास, कप या बाउल प्रयोग में आते हैं। प्रायः किसी विशेष प्रकार की मदिरा के लिये किसी विशेष प्रकार के गिलास को चुनने के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण होता है, परन्तु कई बार ये कारण सामाजिक और सांस्कृतिक भी होते हैं। सामान्यतः सभी प्रकार की मदिरा पारदर्शी गिलासों में पी जाती है जिससे कि मदिरा के रंग को आसानी से देखा और पहचाना जा सके। इसी कारण से प्रायः इन गिलासों पर किसी भी प्रकार की नक्काशी से बचा जाता है और सदैव सादा काँच ही प्रयोग में लाया जाता है। इन्ही गिलासों का एक वर्ग, जिसमें मदिरा को थामने वाला भाग आधार से एक तने से जुड़ा होता है, स्टेमवेयर या तने वाला गिलास कहलाता है।  इनके बारे में हम अगली पोस्ट में पढ़ेंगे। आइये इस पोस्ट में कुछ विशिष्ट प्रकार के गिलासों के बारे में जानते हैं जो कि बियर पीने के लिये प्रयुक्त होते हैं।

बियर स्टाइन (Beer stein): यह अपने नाम के अनुसार बियर पीने के लिये प्रयुक्त होने वाला मग के आकार का पात्र है। बियर प्रायः अधिक मात्रा में पी जाने वाली मदिरा है इसलिये बियर स्टाइन की क्षमता एक पाइन्ट या पिन्ट (pint) अर्थात लगभग आधा लीटर के आसपास होती है।

बियर स्टाइन या बियर मग

बियर स्टाइन या बियर मग

व्हीट बियर ग्लास (Wheat Beer Glass): यह बियर पीने का एक लम्बा गिलास है जो मूलतः गेहूँ से बनी बियर के लिये प्रयुक्त होता था। इसकी क्षमता भी 500 मि.ली. या उससे अधिक होती है। इसे वीज़ेनबीयर (Weizenbier, जर्मन गेहूँ से बनी बियर) ग्लास भी कहते हैं।

व्हीट बियर ग्लास

व्हीट बियर ग्लास

पाइन्ट ग्लास (Pint Glass): यह सामान्य सा दिखने वाला शंक्वाकार गिलास है। नामानुसार इसकी क्षमता एक पाइन्ट (या पिन्ट, लगभग आधा लीटर) होती है।

पाइन्ट ग्लास

पाइन्ट ग्लास

बियर बूट (Beer Boot): यह बूट के आकार का गिलास होता है। इसके बारे में यह कहानी प्रचलित है कि किसी लड़ाई में जनरल ने अपने सैनिकों से यह वादा किया था कि यदि वे इसमें विजयी हुये तो वह अपने बूट में बियर भर के पियेगा। जीतने के बाद उसने इससे बचने के लिये बूट के आकार का ही एक गिलास बनवाया और उसमें बियर पी। इस गिलास का प्रयोग अक्सर त्योहारों और उत्सवों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड आदि देशों में) में और आयोजित बियर पान प्रतियोगिताओं में होता है।

बियर बूट ग्लास

बियर बूट ग्लास

यार्ड ग्लास (Yard Glass): यह भी एक विशेष प्रकार का एक गज (Yard) लम्बा गिलास है जो बियर पान प्रतियोगिताओं में अक्सर प्रयुक्त होता है।

यार्ड ग्लास

यार्ड ग्लास

अगली पोस्ट में हम स्टेम्वेयर या तने वाले गिलासों के बारे में पता करेंगे।

1 टिप्पणी

Filed under ड्रिंकवेयर