Monthly Archives: नवम्बर 2008

वोडका (Vodka)

परम्परागत तरीके से वोडका आलू से निकाली गयी स्टार्च के किण्वन और आसवन से बनता है, पर इसके अलावा इसे अनाज या शीरे से बनाया जाता है। यह एक पारदर्शी और लगभग स्वादहीन मदिरा है जिस कारण इसका प्रयोग बहुत से कॉकटेल बनाने में किया जाता है। इसमें 35-60% तक एल्कॉहल होता है। वोडका प्रमुखतः पूर्वी यूरोप (रूस, उक्रेन, पोलैण्ड आदि) और नॉर्डिक देशों (नॉर्वे, फिनलैण्ड, स्वीडन, आइसलैण्ड और ग्रीनलैण्ड) में पिया जाता है। इसके प्रमुख उत्पादक देश रूस, रोमानिया, पोलैंड और अन्य पूर्वी यूरोपीय देश हैं।

किण्वन के पश्चात मातृद्रव का कई बार आसवन किया जाता है जिससे कि एल्कॉहल प्रतिशत 95-96% तक पहुँच जाता है। तत्पश्चात इसे पारदर्शी और स्वाद रहित बनाने के लिये चारकोल और अन्य निस्पादकों से भली भाँति छाना जाता है। उसके बाद इसे उचित एल्कॉहल प्रतिशत तक लाने के लिये इसमें आसवित जल मिलाकर बोतलबंद कर देते हैं। यूरोप में अक्सर वोडका को बिना कुछ मिलाये पिया जाता है। कई बार वोडका में कुछ फलों (सेब, सन्तरा, नींबू आदि) के कृत्रिम स्वादवर्धक तत्व भी मिलाये जाते हैं।

स्मिर्नऑफ़ (Smirnoff, रूस) और एब्सॉल्यूट (Absolut, स्वीडन) विश्व के सबसे अधिक प्रचलित वोडका ब्राँड हैं। भारत में स्मिर्नऑफ़ के अलावा मैजिक मूमेंट्स (Magic Moments), रोमानोव (Romanov), व्हाइट मिस्चीफ़ (White Mischief), शार्क टूथ (Shark Tooth) और फ़्यूल (Fuel) वोडका उपलब्ध हैं।

वोडका

वोडका

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रम (Rum)

रम गन्ने के रस या शीरे[1] (molasses) के किण्वन और आसवन से बनायी जाती है। इसमें भी 40 से 70% तक एल्कॉहल होता है। प्रमुख उत्पादकों मे कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी देश (कोलम्बिया, गुयाना, वेनेजुएला, ब्राज़ील) आते हैं। रम के प्रचार और प्रसार में 15वीं सदी खोजी नाविकों (कोलम्बस, वास्कोडिगामा आदि), समुद्री डाकुओं (Pirates) और रॉयल नेवी (Royal Navy) का अहम योगदान रहा है। रम एक सस्ती मदिरा है अतः तीसरी दुनिया के देशों में अधिक प्रचलित है।

रंग, स्वाद और उत्पादन क्षेत्र के आधार पर रम कई प्रकार की होती हैं:

लाइट रम (Light Rum): इसे व्हाइट या सिल्वर रम भी कहते हैं। नाम के अनुसार यह पारदर्शी या बहुत हल्के रंग तथा हल्के मीठे स्वाद की होती है। प्रमुखतः इसे कॉकटेल बनाने में प्रयोग किया जाता है। इनका परिपक्वन सामान्यतः नहीं किया जाता, और यदि किया भी जाता है तो किसी भी प्रकार के रंग को हटाने के लिये इसे चारकोल से छाना जाता है। प्वेर्टो रीको (Puerto Rico) की बकार्डी सिल्वर (Bacardi Silver) और ब्राज़ील की कशाका (Cachaça) इस श्रेणी की प्रमुख रम हैं।

गोल्ड रम (Gold Rum): यह सुनहरे या अम्बर रंग की होती है इसलिये इसे अम्बर रम भी कहते है। इनमे रंग ओक के पीपों में किये गये परिपक्वन के कारण आता है। प्रमुख ब्राँड्स हैं – बकार्डी गोल्ड, बारबनकोर्ट 3 स्टार (Barbancourt 3-Star), माउंट गे एक्लिप्स (Mount Gay Eclipse)।

डार्क रम (Dark Rum): इसे ब्लैक रम भी कहते हैं। इन्हें अपेक्षाकृत अधिक समय (7 से 8 वर्ष) के लिये परिपक्वित किया जाता है। इनका प्रयोग बहुत से व्यंजन बनाने में भी किया जाता है। जमैका, बारबेडॉस, बरमूडा, त्रिनिदाद, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड आदि इसके पमुख उत्पादक देश हैं। प्रमुख ब्राँड्स हैं – बकार्डी 8 इयर, कैप्टन मोर्गन ब्लैक लेबल (Captain Morgan Black Lable), मायर्स डार्क (Myers’s Dark), गॉसलिंग्स ब्लैक सील (Gosling’s Black Seal), माउंट गे एक्सट्रा ओल्ड (Mount Gay Extra Old), बारबनकोर्ट 5 स्टार (Barbancourt 5-Star)। भारत में निर्मित ओल्ड मोंक (Old Monk), मैक डॉवेल नं 1 रम और कॉन्टेसा XXX रम इसी श्रेणी की रम हैं।

स्पाइस्ड रम (Spiced Rum): इनमें स्वाद वृद्धि के लिये कुछ मसाले या केरामेल मिलाया जाता है। मुख्य ब्राँड – कैप्टन मोर्गन ओरिजिनल स्पाइस्ड (Captain Morgan Original Spiced),

फ्लेवर्ड रम (Flavored Rum): इनमें कई फलों जैसे सन्तरा, नींबू, आम, नारियल आदि का कृत्रिम स्वाद मिला होता है। प्रमुख ब्राँड हैं – बकार्डी लिमॉन (Bacardi Limon) और कैप्टन मोर्गन पैरट बे (Captain Morgan Parrot Bay)।

प्रीमियम रम (Premium Rum): यह रम अधिक समय तक परिपक्वित की जाती है तथा इनका स्वाद, सुगंध और चरित्र बाकी रमों की अपेक्षा कहीं अधिक होता हैं। इन्हें स्कॉच और कोनयाक से प्रतिस्पर्धा हेतु बनाया जाता है और प्रायः बिना कुछ मिलाये ही पिया जाता है।

रम

रम

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[1] शीरा (molasses) चीनी मिल से निकलने वाला गहरे भूरे रंग का एक सह उत्पाद है। क्रिस्टल न बन सकने वाली शर्करा के अतिरिक्त इसमें सार्थक मात्रा में ग्लूकोज़, फ़्रक्टोज़, विटामिन और खनिज (कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन) तत्व होते हैं।

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ब्रांडी (Brandy)

ब्रांडी को वाइन के आसवन से बनाया जाता है अर्थात ब्रांडी का मुख्य मूल स्रोत अंगूर का रस है। इसमें एल्कॉहल प्रतिशत 36-60% तक होता है और यह डीजेस्टीफ़[1] (digestif) के रूप में ली जाती है। सामान्यतः ब्रांडी का परिपक्वन नहीं किया जाता, यदि किया भी जाता है तो अपेक्षाकृत कम समय के लिये। ब्रांडी के प्रमुख उत्पादक देशों में पश्चिमी यूरोप के देश आते हैं जैसे फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, जर्मनी, इटली आदि। इसके अलावा अमेरिका (कैलिफ़ोर्निया), दक्षिण अफ्रीका, अर्मेनिया, बुल्गारिया, मैक्सिको और साइप्रस भी ब्रांडी का उत्पादन करते हैं। भारत में भी ब्रांडी के गिने चुने ब्राँड उपलब्ध हैं – हनी बी ब्रांडी, डॉक्टर्स ब्रांडी आदि। अंगूर के अलावा किसी अन्य फल के रस से बनी ब्रांडी को फ्रूट ब्रांडी या उस फल के नाम की ब्रांडी कहते हैं जैसे – कोकोनट ब्रांडी, एप्पल ब्रांडी आदि। इसके अलावा फलों के छिलकों और रस निकालने के बाद बचे गूदे जिसे पामेस (pomace) कहते हैं, से भी ब्रांडी बनाई जाती है।

अंगूर से निर्मित ब्रांडी के प्रकार: उत्पादन क्षेत्र के आधार पर यूरोप की तीन सर्वप्रसिद्ध ब्रांडी हैं –

कोनयाक (Cognac): फ्रांस के कोनयाक क्षेत्र में निर्मित ब्रांडी को कोनयाक कहते हैं। इसके प्रमुख ब्राँड्स हैं – हाइन (Hine), मारटेल (Martell), रेमी मार्टिन (Rémy Martin), हेनेसी (Hennessy), रेनॉ सबोरिन (Ragnaud-Sabourin), डेलामेन (Delamain) और करवाइज़र (Courvoisier)।

आर्मनयाक (Armagnac): दक्षिण पश्चिमी फ्रांस के आर्मनयाक इलाके के अंगूर से निर्मित ब्रांडी को आर्मनयाक कहते हैं। इसके प्रमुख ब्राँड्स हैं – डेरॉज़ (Darroze), बैरॉन डी सिगॉनयाक (Baron de Sigognac), लैरेसिंगल (Larressingle), डेलॉर्ड (Delord) और जानॉ (Janneau)।

ब्रांडी डि जारेज़ (Brandy de Jerez): दक्षिणी स्पेन के जारेज़ क्षेत्र में बनी ब्रांडी को ब्रांडी डि जारेज़ कहते हैं। इसे स्पेन की प्रसिद्ध फोर्टीफाइड वाइन, शेरी (Sherry) बनाने के लिये भी प्रयोग में लाया जाता है।

फ्रूट ब्रांडी के प्रकार:

ओ-डी-वी (Eau-de-vie): सामान्य फ्रेंच फ्रूट ब्रांडी
केल्वाडोस (Calvados): सेब से बनी एक फ्रेंच ब्रांडी
कोकोनट ब्रांडी: नारियल पानी या उसके पेड़ से निकाले रस से निर्मित ब्रांडी
जर्मन श्नाप्स (Schnaps): जर्मनी और ऑस्ट्रिया की फ्रूट ब्रांडी
कीर्शवासर (Kirschwasser): जर्मनी, स्विटज़रलैंड और फ्रांस में चेरी से बनी ब्रांडी
इसके अलावा लगभग सभी यूरोपीय देशों में फलों की ब्रांडी की एक विशिष्ट किस्म पायी जाती है।

पामेस (Pomace) ब्रांडी: इटली की ग्रापा (Grappa), फ्रांस की मार्क (Marc) और जॉर्जिया की चा-चा (Chacha) प्रसिद्ध पामेस ब्रांडी हैं।

इसके अलावा ब्रांडी के लेबल पर ए सी (A C), वी एस (V S), वी एस ओ पी (V S O P), एक्स ओ (X O) या विंटेज (Vintage) लिखा होता है जिनका मतलब है –
ए सी (A C): दो साल परिपक्वित
वी एस (V S): “वेरी स्पेशल” या थ्री स्टार, तीन साल परिपक्वित
वी एस ओ पी (V S O P): “वेरी स्पेशल ओल्ड पेल” या फाइव स्टार, पाँच साल परिपक्वित
एक्स ओ (X O): “एक्सट्रा ओल्ड”, सामान्यतः छः साल परिपक्वित
विंटेज (Vintage): अंकित विंटेज वर्ष के अंगूरों से निर्मित और बोतल बन्द होने तक परिपक्वित

ब्रांडी

ब्रांडी

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[1] डीजेस्टीफ़ (digestif) एक फ़्रेंच शब्द है जिसका मतलब है भोजन के पश्चात पिया जाने वाला एल्कॉहलिक पेय या पाचन बढ़ाने वाली मदिरा। इसके विपरीत भोजन से पूर्व लिये जाने वाले एल्कॉहलिक पेय को अपेरेटीफ़ (aperitif), या भूख बढ़ाने वाली मदिरा कहते हैं।

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अन्य व्हिस्कियाँ

अभी तक हमने स्कॉच, आयरिश और अमेरिकन व्हिस्की की विशेषताओं और ब्राँड्स के बारे में जाना। इस पोस्ट में हम इसके अतिरिक्त विश्व में प्रचिलित कुछ व्हिस्कियों के बारे में जानेंगे।

केनेडियन व्हिस्की (Canadian Whisky): कनाडा में पूर्णतया निर्मित व्हिस्की जो कि न्यूनतम तीन वर्षों के लिये ओक की लकड़ी के पीपों में परिपक्वित की गयी हो केनेडियन व्हिस्की कहलाती है। इसे बनाने के लिये मुख्यतः राय ही प्रयुक्त होता है। एक समय विश्व की सबसे बड़ी व्हिस्की कम्पनी सीग्राम (Seagram) का मुख्य केन्द्र क्यूवेक में था, बाद में इसे डायेगो (Diageo) और पेर्नॉड रिकार्ड (Pernod Ricard) ने अभिग्रहित कर लिया। प्रमुख केनेडियन व्हिस्की हैं – ग्लेन ब्रेटन (Glen Breton), अलबर्टा प्रीमियम (Alberta Premium), केनेडियन क्लब (Canadian Club), फ़ोर्टी क्रीक (Forty Creek), क्राउन रॉयल (Crown Royal), ब्लैक वेलवेट (Black Velvet) और वाइज़र्स (Wiser’s)।

जापानी व्हिस्की (Japanese Whisky): जापानी व्हिस्की काफी कुछ स्कॉच से मिलती जुलती है और उसी के तरह बनाई जाती है। कुछ वर्षों पूर्व तक जापानी व्हिस्की केवल घरेलू बाजार तक ही सीमित थी परन्तु आजकल इसने अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। प्रमुख जापानी व्हिस्की हैं – यामाज़ाकी (Yamazaki), हाकुशु (Hakushu), योची (Yoichi), मियागिक्यो (Miyagikyo), कारिजावा (Karuizawa), मार्स शिन्शु (Mars Shinshu)।

भारतीय व्हिस्की (Indian Whisky): भारत में यद्यपि मदिरा पान को सामाजिक स्वीकृति नहीं है तथापि यह व्हिस्की के विश्व में सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है। अधिकतर भारतीय व्हिस्कियों का एक बड़ा भाग शीरे के किण्वन से बनाया जाता है अतः इसे व्हिस्की की स्थान पर रम श्रेणी में रखा जाना चाहिये। परन्तु सामान्यतया इनमें स्वाद के लिये कुछ मात्रा में या तो भारतीय या फिर आयातित अनाजों से बनाई व्हिस्की मिलाई जाती है इसलिये इसे व्हिस्की की श्रेणी में ही रखते हैं। भारत में बहुत सी विदेशी व्हिस्कियों का उत्पादन होता है, इसे इंडियन मेड फ़ॉरेन लिकर (IMFL) की श्रेणी में गिना जाता है। कुछ प्रमुख IMFL व्हिस्की ब्रांड्स हैं – रॉयल चैलेंज(Royal Challange), ब्लेंडर्स प्राइड (Blender’s Pride), रॉयल स्टैग (Royal Stag), इम्पीरियल ब्लू (Imperial Blue), सिग्नेचर (Signature), मैकडावेल नं 1 (Mcdowell’s No.1), बैगपाइपर (Bagpiper), एन्टीक्विटी (Antiquity), डी वाई सी (DYC)। इसके अतिरिक्त भारत में बहुत सी स्कॉच व्हिस्की भी आयात करके बोतलों में भरी जाती हैं इनमें से कुछ प्रमुख हैं – सीग्राम की पासपोर्ट (Passport), 100 पाइपर्स (100 Pipers) और समथिंग स्पेशल (Something Special); हेग (Haig), हेजेस एंड बटलर (Hedges & Butler), ब्लैक एंड व्हाइट (Black & White), ब्लैक डॉग (Black Dog), टीचर्स (Teacher’s), जे एंड बी (J & B), व्हाइट एंड मैके (Whyte & Mackay) इत्यादि। यदि कम्पनियों का दावा माने तो इन स्कॉच में कोई मिलावट नहीं की जाती। विश्वास पर दुनिया कायम है। हाल में ही कुछ सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की भी भारत में बोतल बन्द होने लगी हैं जैसे – डालमोर (Dalmore), आइल ऑफ़ जुरा (Isle of Jura), ग्लेन ड्रूमंड (Glen Drummond) इत्यादि। बंगलूरू स्थित अमृत (Amrut) डिस्टलरी भारत की एक मात्र सिंगल माल्ट व्हिस्की उत्पादक है।

इसके अलावा भी अन्य देशों में व्हिस्की उत्पादन होता है परन्तु उनकी पहुँच अधिकतर सिर्फ उन्हीं देशों तक ही सीमित है।

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अमेरिकन व्हिस्की (American Whiskey)

अंकुरित पिसे हुये अनाज से अमेरिका में बनी व्हिस्की को अमेरिकन व्हिस्की कहते हैं। सम्भवतः स्कॉच के बाद विश्व में सबसे अधिक इसी की मांग है। यह यह मुख्यतः छः प्रकार की होती है – बरबन व्हिस्की (Bourbon Whiskey), राय[1] व्हिस्की (Rye Whiskey), व्हीट व्हिस्की (Wheat Whiskey), टेनेसी व्हिस्की (Tennessee Whiskey), कॉर्न व्हिस्की (Corn Whiskey) और ब्लेंडेड अमेरिकन व्हिस्की (Blended American Whiskey)। अमेरिकन व्हिस्की जलाये गये ओक की लकड़ी के पीपों (charred oak cask) में परिपक्वित की जाती है। यदि परिपक्वन का समय दो वर्ष से अधिक हो तो व्हिस्की के नाम के आगे स्ट्रेट (straight) जुड़ जाता है, जैसे स्ट्रेट बरबन व्हिस्की।

बरबन व्हिस्की: इसमें प्रयुक्त अनाज में कम से कम 51% मक्का होना चाहिये। जिम बीम (Jim Beam), बफ़ेलो ट्रेस (Buffalo Trace), मेकर्स मार्क (Maker’s Mark), वुडफ़ोर्ड रिसर्व (Woodford Reserve) और वाइल्ड टर्की (Wild Turkey) कुछ प्रसिद्ध बरबन व्हिस्की के ब्राँड हैं।

राय और व्हीट व्हिस्की: इसमें कम से कम 51% राय (rye) या गेहूँ (wheat) का होना आवश्यक है। इस किस्म की व्हिस्की प्रायः ब्लेंडेड व्हिस्की में मिलाने के लिये प्रयुक्त होती है और काफ़ी कम मात्रा में स्ट्रेट राय या व्हीट व्हिस्की के रूप में मिलती है। वाइल्ड टर्की (Wild Turkey), वान विंकल (Van Winkle), रिटेन्हाउस (Rittenhouse) इत्यादि प्रमुख राय व्हिस्कियाँ हैं।

कॉर्न व्हिस्की: इसमें 80% से अधिक मक्का होता है। सामान्यतया इसके परिपक्वन की आवश्यकता नहीं होती और यदि इसका परिपक्वन किया भी जाता है तो काफ़ी कम समय के लिये (लगभग छः महीने) वो भी बिना जलाये गये ओक के पीपों में।

अमेरिकन ब्लेंडेड व्हिस्की: इसमें 20% तक बरबन या राय व्हिस्की और शेष 80% औद्योगिक स्प्रिट होती है। इसलिये अमेरिकन ब्लेंडेड व्हिस्की काफ़ी सस्ती होती है।

टेनेसी व्हिस्की: यह अमेरिका के टेनेसी राज्य में बनाई जाती है। इस व्हिस्की को डिस्टिलेशन के बाद परिपक्वन के लिये रखने से पहले मेपल की लकड़ी के कोयले से छानते हैं। जिससे इसमें एक विशेष प्रकार का स्वाद और सुगंध मिश्रित हो जाती है। टेनेसी व्हिस्की के केवल दो ब्राँड्स उपलब्ध हैं – जैक डेनियल्स (Jack Daniel’s) और जॉर्ज डिकेल (George Dickel)।

अमेरिकन व्हिस्कियाँ

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[1] राय, गेहूँ की तरह का ही परन्तु उससे निकृष्ट अनाज है।

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आयरिश व्हिस्की (Irish Whiskey)

स्कॉच के बाद आयरिश व्हिस्की सबसे अधिक प्रसिद्ध है यद्यपि उपलब्धता और मांग के आधार पर यह अन्य कई व्हिस्कियों से पीछे है। इस पोस्ट में हम आयरिश व्हिस्की की विशेषताओं और प्रमुख ब्राँड्स के बारे में जानेंगे।आयरलैंड में बनी व्हिस्की को आयरिश व्हिस्की कहते हैं। आयरलैंड की स्कॉटलैंड से भौगोलिक समानता के कारण आयरिश व्हिस्की भी लगभग उसी विधि से बनाई जाती है। परन्तु लम्बे समय से ही दोनों एक दूसरे से अच्छी गुणवत्ता की व्हिस्की बनाने का दावा करते रहे हैं। आयरिश व्हिस्की सिंगल माल्ट, सिंगल ग्रेन, और ब्लेंडेड व्हिस्की के अलावा प्योर पॉट स्टिल की किस्म में भी मिलती है। 90 से अधिक स्कॉटिश मद्यनिष्कर्षशालाओं (Distilleries) के विपरीत आयरलैंड में केवल 3 मद्यनिष्कर्षशालायें हैं – न्यू मिडलटन डिस्टिलरी (New Midleton Distillery), ओल्ड बुशमिल्स डिस्टिलरी (Old Bushmills Distillery) और कूली डिस्टिलरी (Cooley Distillery)। पिछली कुछ शताब्दियों में खराब आर्थिक स्थिति के कारण कई मद्यनिष्कर्षशालायें बन्द हो गयीं और अन्य इन तीनों में विलीन हो गयीं।

प्रमुख ब्राँड्स: बुशमिल्स (Bushmills), जेमसन (Jameson), ग्रीन स्पॉट (Green Spot), रेडब्रेस्ट (Redbreast), मिडलटन (Midleton),तुलामोर ड्यू (Tulaamore Dew), माइकल कोलिंस (Michael Collins), इरिन गो ब्रॉ (Erin Go Bragh) और नेपोग  (Knappogue) आदि कुछ प्रसिद्ध आयरिश व्हिस्की हैं।

आयरिश व्हिस्कियाँ

आयरिश व्हिस्कियाँ

आयरिश कॉफ़ी (Irish Coffee) एक प्रसिद्ध कॉकटेल (मद्य मिश्रित पेय) है जो आयरिश व्हिस्की से बनाया जाता है। इसे 4 भाग गर्म कॉफ़ी, 2 भाग आयरिश व्हिस्की और एक भाग क्रीम मिलाकर बनाया जाता है।

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स्कॉच व्हिस्की (Scotch Whisky)

पिछली पोस्ट में हमने जाना कि व्हिस्की अनाजों से बनाई जाती है तथा माल्ट और ग्रेन दो प्रकार की होती है। स्कॉच, आयरिश, केनेडियन और अमेरिकन व्हिस्की विश्व की प्रमुख व्हिस्कियाँ हैं। इस पोस्ट में हम स्कॉच व्हिस्की के बारे और जानकारी प्राप्त करेंगे और इनकी विशेषताओं को जानेंगे।

स्कॉटलैंड में पूर्णतया निर्मित व्हिस्की को स्कॉच व्हिस्की या सिर्फ स्कॉच कहते हैं। स्कॉटलैंड को व्हिस्की उत्पादन के हिसाब से पाँच भागों में बाँटा जा सकता है-

स्पेसाइड (Speyside): उत्तरी स्कॉटलैंड में स्पे नदी के आसपास के इलाक़े को स्पेसाइड कहते हैं। यहाँ सर्वाधिक मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं जिनमें से ग्लेनफ़िडिक[1](Glenfiddich), ग्लेनलिवेट (Glenlivet), बालवीनी (Balvenie), स्पेबर्न (Speyburn), अबर्लोर (Aberlour) और मैकालन (Macallan) प्रमुख हैं।

हाईलैंड (Highland): इस इलाके की प्रमुख मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं डालमोर (Dalmore), डालव्हीनी (Dalwhinnie), ग्लेनमोरेंगी (Glenmorangie), ओबन (Oban), बालब्लेयर (Balblair)। इसके अलावा अनेक द्वीप (आइले को छोड़कर) भी इसी इलाके में गिने जाते हैं। इन द्वीपों के नाम पर ही यहाँ की मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं – अरान (Arran), आइल ऑफ़ जुरा (Isle of Jura), हाइलैंड पार्क (Highland Park), टालिस्कर (Talisker), टॉबरमरी (Tobermory)  और स्कापा (Scapa)।

लोलैंड (Lowland): यहाँ अब केवल तीन मद्यनिष्कर्षशालाऐं ही सक्रिय हैं – ग्लेनकिंची (Glenkinchie), ब्लैडनॉक (Bladnoch) और ऑकेन्टोशन (Auchentoshan)।

आइले (Isle): यहाँ पर आज आठ सक्रिय मद्यनिष्कर्षशालाऐं हैं – बाउमोर (Bowmore), लैफ्रोएग (Laphroaig), लैगावुलिन (Lagavulin)।

कैम्पबेलटाउन (Campbeltown): एक समय पर यहाँ 30 से अधिक मद्यनिष्कर्षशालाऐं थीं परन्तु अब उनमें से तीन ही सक्रिय हैं – ग्लेनगाइल (Glengyle), ग्लेन स्कॉटिया (Glen Scotia) और स्प्रिंगबैंक (Springbank)।

सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की प्रायः मद्यनिष्कर्षशाला के नाम पर ही होती है जबकि ब्लेंडेड व्हिस्की मास्टर ब्लेंडर की कम्पनी के नाम पर होती है। मास्टर ब्लेंडर उस आदमी को कहते हैं जिसने सर्वप्रथम कई मद्यनिष्कर्षशालाओं से अलग अलग प्रकार की व्हिस्की लेकर उन्हें मिलाने के बाद एक अनूठी व्हिस्की को जन्म दिया। व्हिस्की पर अंकित वर्ष उसमें मिलाई गयी सबसे नयी व्हिस्की की उम्र बताता है अर्थात 12 वर्ष पुरानी ब्लेंडेड व्हिस्की में केवल 12 वर्ष या उससे अधिक पुरानी व्हिस्की ही मिली होगी।

सिंगल माल्ट स्कॉच

सिंगल माल्ट स्कॉच

ब्लेंडेड स्कॉच

ब्लेंडेड स्कॉच

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[1] ग्लेन का अर्थ होता है दो पहाड़ियों के बीच किसी नदी की घाटी। अतः जिस भी मद्यनिष्कर्षशाला के नाम में ग्लेन आता है वह ऐसी ही किसी घाटी में स्थित होती है। उदाहरण के लिये ग्लेनफ़िडिक नामक मद्यनिष्कर्षशाला फ़िडिक नदी की घाटी में स्थित है।

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